MERI में एआई, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और उभरती तकनीकों पर फैकल्टी अध्ययन कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव

MERI में एआई, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और उभरती तकनीकों पर फैकल्टी अध्ययन कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव

मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (MERI), नई दिल्ली में 26 जून को आयोजित विशेष फैकल्टी अध्ययन एवं प्रस्तुति कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित उभरती नई तकनीकों पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को वैश्विक तकनीकी परिवर्तनों की गहन समझ विकसित कराना और उन्हें इन विषयों को विद्यार्थियों तक बेहतर ढंग से पहुंचाने के लिए तैयार करना था। कार्यक्रम में डीएससीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री विनायक गोडसे, एयर वाइस मार्शल वीएसएम (डॉ.) देवेश वत्सा तथा मेजर जनरल मनजीत सिंह मोखा ने मार्गदर्शन दिया।

इस कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों को दस समूहों में बांटा गया। हर समूह को अलग-अलग विषयों पर अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई। अध्ययन के प्रमुख विषयों में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एनवीडिया, इंटेल, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स और क्वालकॉम जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों के नए विकास शामिल थे। इसके अलावा ओपनएआई, क्लॉड और चीन के एआई मॉडल, एजेंटिक एआई तथा फिगर एआई, यूनिट्री और एजीआईबॉट जैसी कंपनियों के ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

फैकल्टी ने केवल नई तकनीकों की जानकारी ही नहीं जुटाई, बल्कि यह भी समझने का प्रयास किया कि इन तकनीकों के पीछे क्या सोच है, इनका दुनिया और भारत पर क्या असर पड़ सकता है, उद्योगों और अर्थव्यवस्था को इससे क्या लाभ मिलेगा और इनके बढ़ते उपयोग के साथ कौन-कौन सी नीतिगत चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

सभी समूहों ने अपने अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए, जिसके बाद प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रस्तुतियों का मूल्यांकन अध्ययन की गुणवत्ता, विषय की समझ, विश्लेषण क्षमता, विचारों की स्पष्टता और कठिन तकनीकी विषयों को सरल भाषा में समझाने की योग्यता के आधार पर किया गया।

MERI का यह प्रयास फैकल्टी को नई तकनीकों की जानकारी से लगातार अपडेट रखने और शोध आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती डिजिटल दुनिया के अनुरूप ज्ञान और कौशल देना तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

More From Author

"हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं": आदिवासी समुदाय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग धर्म कोड, संवैधानिक अधिकारों और पहचान की रक्षा हेतु 21 मांगों पर हस्तक्षेप की अपील की

“हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं”: आदिवासी समुदाय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग धर्म कोड, संवैधानिक अधिकारों और पहचान की रक्षा हेतु 21 मांगों पर हस्तक्षेप की अपील की

नवरंगपुरा में इन्दिरा आईवीएफ के नए अत्याधुनिक सेंटर का शुभारंभ, फर्टिलिटी सेवाओं को मिलेगा विस्तार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्रिप्टो

टोकनयुक्त शेयर कैसे बन रहे हैं वैश्विक वित्त की नई दिशा, भारत को क्या करना चाहिए?

नई दिल्ली: शेयरों की खरीद और बिक्री की वैश्विक व्यवस्था में तेजी से परिवर्तन आ रहा है। इस बदलाव का नेतृत्व अब पारंपरिक स्टॉक एक्सचेंजों के बजाय क्रिप्टो मंचों के हाथ में दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष के दौरान...