भारत में टोकनाइज्ड कमोडिटीज: अवसर, संभावनाएं और विस्तार की राह

भारत में टोकनाइज्ड कमोडिटीज: अवसर, संभावनाएं और विस्तार की राह

नई दिल्ली: हर साल भारत के घरों और मंदिरों में खरबों रुपये का सोना बंद पड़ा रहता है, जिसका आर्थिक उपयोग बहुत सीमित होता है। दूसरी ओर, गेहूं, कपास और धातुओं की करोड़ों टन मात्रा ऐसे बाजारों से गुजरती है, जो बड़े होने के बावजूद अब भी काफी हद तक कागजी प्रक्रियाओं पर चलते हैं। भारत की विशाल कमोडिटी संपदा और उसके वित्तीय उपयोग के बीच यही अंतर वह चुनौती है, जिसे टोकनाइजेशन दूर करने की कोशिश करता है।

टोकनाइजेशन का अर्थ किसी वास्तविक संपत्ति—जैसे एक ग्राम सोना, कपास की एक गांठ या एक टन तांबा—के स्वामित्व को ब्लॉकचेन पर एक डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज करना है। ब्लॉकचेन एक साझा और छेड़छाड़-रोधी डिजिटल रिकॉर्ड है, जिसे सत्यापित किया जा सकता है। किसी टोकन का मूल्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पीछे कमोडिटी पर वास्तविक और सत्यापित दावा है या नहीं, वह उचित कस्टडी में रखी गई है या नहीं और उसे वापस प्राप्त करने का स्पष्ट रास्ता मौजूद है या नहीं। सही तरीके से लागू होने पर यह बड़ी और अविभाज्य संपत्तियों को छोटी और किफायती इकाइयों में बांट सकता है, कागजी प्रक्रिया के बजाय स्वामित्व का तत्काल हस्तांतरण संभव बना सकता है और रिकॉर्ड की जांच आसान करके धोखाधड़ी की गुंजाइश कम कर सकता है।

वर्चुअल डिजिटल एसेट (वीडीए) उद्योग ने इस विचार को एक काम करने वाले बाजार में बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। दुनियाभर में टोकनाइज्ड कमोडिटीज में हर महीने 7.12 अरब डॉलर का ट्रांसफर वॉल्यूम दर्ज किया जा रहा है। इस बाजार में करीब 3.2 लाख धारक और 40 से अधिक ट्रैक किए जा रहे उत्पाद शामिल हैं। गोल्ड-बैक्ड टोकन इस बाजार पर हावी हैं। पैक्सोस गोल्ड और टीथर गोल्ड मिलकर बाजार के करीब तीन-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के जरिए धारकों को वास्तविक सोने पर दावा मिलता है, जिसे ऑडिट किए गए वॉल्ट में रखा जाता है और जारीकर्ता के माध्यम से रिडीम किया जा सकता है। वीडीए उद्योग द्वारा विकसित क्रिप्टो एक्सचेंज, डिजिटल वॉलेट और ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर ने छोटे हिस्सों में बंटे इन एसेट्स में चौबीसों घंटे कारोबार को संभव बनाया है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी खुद निष्पादित होने वाला कोड, उन सेटलमेंट प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है जिनमें पहले कई दिन और काफी कागजी कार्रवाई लग सकती थी।

भारत में अभी ब्लॉकचेन आधारित कोई सक्रिय टोकनाइज्ड कमोडिटी बाजार नहीं है, लेकिन इस तरह के बाजार के लिए जरूरी काफी आधारभूत ढांचा पहले से मौजूद है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा 2021 में शुरू किए गए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआर) के जरिए निवेशक ऑडिट किए गए वॉल्ट में रखे सोने से समर्थित डीमैट खातों के माध्यम से सोना रख और उसका कारोबार कर सकते हैं। वहीं, वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा विनियमित इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रिसीट्स (ई-एनडब्ल्यूआर) किसानों और अन्य कमोडिटी धारकों को पंजीकृत गोदामों में रखे अनाज और कपास के स्वामित्व को डिजिटल रूप से हस्तांतरित करने की सुविधा देते हैं। ये व्यवस्थाएं समस्या के सबसे कठिन हिस्सों में से एक को हल करती हैं—इलेक्ट्रॉनिक रूप से यह साबित करना कि किस संपत्ति का मालिक कौन है। लेकिन इनमें अभी वह क्रिप्टो लेयर नहीं है, जो इस स्वामित्व को छोटे हिस्सों में बांटकर व्यापक निवेशक वर्ग के लिए कारोबार योग्य बना सके। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर—आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर—और ऑनबोर्डिंग तथा अनुपालन प्रक्रियाओं को पहले से संभाल रहे तेजी से बढ़ते क्रिप्टो एक्सचेंज देश को इस व्यवस्था के लिए जरूरी कई प्रमुख हिस्से उपलब्ध कराते हैं।

यहां कमी तकनीक की नहीं, बल्कि नियामकीय ढांचे की है। सेबी कमोडिटी डेरिवेटिव्स और गोल्ड रिसीट्स को नियंत्रित करता है, जबकि डब्ल्यूडीआरए वेयरहाउस रिसीट्स को विनियमित करता है। लेकिन अभी कोई एक प्राधिकरण ऐसा नहीं है जो यह तय करता हो कि इन व्यवस्थाओं के ऊपर कोई टोकन किस तरह काम करेगा। इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) ने इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए 2025 में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें कुछ प्रमुख सिद्धांत सामने रखे गए हैं—टोकन और संपत्ति के बीच स्पष्ट कानूनी संबंध, विश्वसनीय कस्टडी, रिडेम्पशन के स्पष्ट अधिकार और जारीकर्ता, कस्टोडियन तथा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के बीच स्पष्ट अलगाव। फिलहाल यह व्यवस्था केवल भारत के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटरों तक सीमित है, व्यापक घरेलू बाजार तक नहीं।

हर कमोडिटी टोकनाइजेशन के लिए समान रूप से तैयार नहीं है। सोना और तांबा तथा एल्युमिनियम जैसी धातुएं इसके लिए सबसे अधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि इनका कारोबार पारदर्शी एक्सचेंजों पर होता है, इनके गुणवत्ता मानक स्थापित हैं और इन्हें विनियमित तथा ऑडिट किए गए भंडारण में रखा जाता है। गेहूं और कपास में भी संभावनाएं हैं, खासकर किसानों के लिए वित्त उपलब्ध कराने के लिहाज से, लेकिन इनके सामने कई चुनौतियां हैं। इनमें गोदामों की गुणवत्ता में अंतर, सरकारी खरीद नीतियों से प्रभावित कीमतें और बड़े लॉट साइज शामिल हैं, जो छोटे निवेशकों की भागीदारी को सीमित कर सकते हैं।

यहीं क्रिप्टो एक्सचेंज और पंजीकृत वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (वीएएसपी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं—मौजूदा संस्थानों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उनके ऊपर एक कनेक्टिव लेयर के रूप में। वीएएसपी निवेशकों की ऑनबोर्डिंग संभाल सकता है, टोकन के पूरे जीवनचक्र में पहचान और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच को शामिल कर सकता है और बिखरे हुए बाजारों में अधिक तरलता लाने के लिए ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकता है। इससे कानूनी स्वामित्व मौजूदा वेयरहाउस और गोल्ड रिसीट्स से जुड़ा रह सकता है, जबकि इन संपत्तियों को व्यापक निवेशकों और ऋणदाताओं के लिए उपयोग करना आसान हो सकता है।

नीति निर्माताओं के सामने अब स्पष्ट कार्य है: ऐसा नियामकीय दायरा तैयार करना जो टोकन को लागू किए जा सकने वाले संपत्ति अधिकारों से जोड़े, बजाय इसके कि हर नियामक अलग-अलग काम करे। साथ ही, क्रिप्टो और वीडीए उद्योग को इस बाजार की ट्रेडिंग और कस्टडी लेयर तैयार करने में संभावित भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए। सही तरीके से लागू होने पर यह केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं होगा; यह भारतीय घरों और किसानों के पास निष्क्रिय पड़ी पूंजी को सक्रिय करने का एक माध्यम बन सकता है—उसी तकनीक के जरिए, जिसने टोकनाइजेशन को दुनिया में तेजी से बढ़ते एसेट क्लास के रूप में उभरने में मदद की है।

More From Author

शांति और वैश्विक सहयोग पर वॉशिंगटन में जुटेंगे नेता, माइक जॉनसन होंगे शामिल

शांति और वैश्विक सहयोग पर वॉशिंगटन में जुटेंगे नेता, माइक जॉनसन होंगे शामिल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्रिप्टो

भारत में टोकनाइज्ड कमोडिटीज: अवसर, संभावनाएं और विस्तार की राह

नई दिल्ली: हर साल भारत के घरों और मंदिरों में खरबों रुपये का सोना बंद पड़ा रहता है, जिसका आर्थिक उपयोग बहुत सीमित होता है। दूसरी ओर, गेहूं, कपास और धातुओं की करोड़ों टन मात्रा ऐसे बाजारों से गुजरती है,...