रविंद्र राव और अनुराग पोकुरी की दादा-पोते की जोड़ी ने साथ पूरा किया माउंट एल्ब्रुस अभियान, अब दुनिया की सातों ऊंची चोटियों पर चढ़ने का सपना
नई दिल्ली: कुछ सपने उम्र नहीं देखते। 72 वर्षीय लिंगम रविंद्र राव और उनके 17 वर्षीय पोते अनुराग पोकुरी ने माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ाई कर इस बात को साबित कर दिया है। दादा-पोते की इस जोड़ी ने 5,642 मीटर ऊंची चोटी पर अपने साझा पर्वतारोहण अभियान को नई ऊंचाई दी।
रविंद्र राव ने 14 अगस्त को माउंट एल्ब्रुस के वेस्ट पीक पर चढ़ाई पूरी की। उनकी उम्र उस समय 72 साल, एक महीना और 13 दिन थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह एल्ब्रुस पर चढ़ने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय हैं।
उनके पोते अनुराग पोकुरी ने भी अभियान में शानदार प्रदर्शन किया। 17 वर्षीय अनुराग ने एल्ब्रुस की वेस्ट और ईस्ट दोनों चोटियों पर लगातार चढ़ाई की और दोनों को 3 घंटे 44 मिनट में पूरा किया।
साइकिल से शुरू हुआ सफर पहाड़ों तक पहुंचा
रविंद्र राव की कहानी केवल पर्वतारोहण तक सीमित नहीं है। 18 साल की उम्र में IIT खड़गपुर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने खड़गपुर से दार्जिलिंग तक साइकिल से करीब 1,700 किलोमीटर का सफर किया था।
करीब पांच दशक बाद उनका यही एडवेंचर और फिटनेस का जुनून उन्हें दुनिया की ऊंची चोटियों तक ले आया। 2024 में उन्होंने माउंट किलिमंजारो और माउंट लाबूश पर चढ़ाई की थी।

दादा-पोते का सपना है सेवन समिट्स
एल्ब्रुस की चढ़ाई के बाद अब दोनों का लक्ष्य सेवन समिट्स पूरा करना है। इसका मतलब है दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना।
अनुराग अभी International School Hyderabad में कक्षा 12 के छात्र हैं। कम उम्र में ही पर्वतारोहण का अनुभव हासिल कर चुके अनुराग के लिए एल्ब्रुस अभियान उनके भविष्य के एडवेंचर सफर की दिशा में बड़ा कदम है।
खेलों को स्कूलों में बढ़ावा देने की अपील
रविंद्र राव बच्चों को कम उम्र से खेलों से जोड़ने की वकालत करते हैं। उनका मानना है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उसे सही उम्र में पहचानकर उचित प्रशिक्षण देना जरूरी है।
उनका संदेश साफ है—फिटनेस और खेल को जीवन का हिस्सा बनाया जाए और बच्चों को अपनी पसंद के खेल में आगे बढ़ने के लिए सही अवसर दिए जाएं।
72 साल की उम्र में एल्ब्रुस पर चढ़ाई और 17 साल के पोते के साथ साझा सपना यह बताता है कि जुनून जिंदा हो तो उम्र सिर्फ एक संख्या है।