कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय मूल्यों के साथ अपनाने की जरूरत : प्रो. आई. पी. अग्रवाल

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय मूल्यों के साथ अपनाने की जरूरत : प्रो. आई. पी. अग्रवाल

नई दिल्ली: प्रबंधन शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एमईआरआई) में सोमवार से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण पर केंद्रित एक सप्ताह का अंतरराष्ट्रीय शिक्षक विकास कार्यक्रम आरंभ हुआ। उच्च शिक्षा में तेजी से बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बनाना है। कार्यक्रम में लगभग 70 शिक्षकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के स्वागत सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. ललित अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा की दिशा और स्वरूप को तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में शिक्षकों को नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व देना होगा। उनका कहना था कि तकनीक तभी सार्थक होगी, जब वह शिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुदृढ़ बनाए।

कार्यक्रम का उद्घाटन त्रिवेणी शैक्षिक एवं सामाजिक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रो. आई. पी. अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि यह पहल शिक्षकों को विषय विशेषज्ञों और उद्योग जगत के अनुभवी व्यक्तियों से संवाद का अवसर देगी, जिससे वे नवीन तकनीकों को समझकर उन्हें शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से शामिल कर सकेंगे।

कार्यक्रम के पहले शैक्षणिक सत्र में मुस्कान ने शिक्षण संबंधी आंकड़ों के विश्लेषण और उनके प्रभावी उपयोग पर व्यावहारिक प्रस्तुति दी। दूसरे सत्र में डॉ. भारती कवाडे ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन के आकलन, पाठ्यक्रम नियोजन और संस्थागत निर्णय प्रक्रिया में शैक्षणिक विश्लेषण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आंकड़ा आधारित व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ मूल्यांकन और मान्यता प्रक्रियाओं को भी अधिक प्रभावी बनाती है।

यह कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) दीप्तिशिखा कालरा के संयोजन तथा डॉ. सरिता यादव और डॉ. सिमरनजीत कौर बग्गा के सह-संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।

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