पद्म श्री से सम्मानित प्रो. वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री का एमईआरआई कॉलेज में स्वागत

संस्कृत विद्वान और पद्म श्री सम्मानित प्रो. वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री का एमईआरआई कॉलेज में स्वागत

प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और पद्म श्री से सम्मानित प्रो. वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री ने मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईआरआई कॉलेज) का दौरा किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी भी उनके साथ मौजूद रहे। एमईआरआई कैंपस में प्रो. शास्त्री की उपस्थिति कॉलेज के लिए गौरव और सम्मान का क्षण रही।

एमईआरआई कॉलेज की डीन प्रो. दीपशिखा कालरा, मेजर जनरल मनजीत सिंह मोखा (सेवानिवृत्त), एयर कमोडोर हिमांशु गोपाल (सेवानिवृत्त) सहित अंतरिक्ष अध्ययन विभाग और अन्य संकाय सदस्यों ने प्रो. कुटुम्बा शास्त्री का स्वागत किया तथा उन्हें पद्म श्री सम्मान मिलने पर बधाई दी। कार्यक्रम का आयोजन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा किया गया।

कॉलेज के अध्यापकों और स्टाफ के साथ संवाद के दौरान प्रो. कुटुम्बा शास्त्री ने संस्कृत भाषा और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को भी आगे बढ़ाना आवश्यक है। संस्कृत को भारत की ज्ञान विरासत बताते हुए उन्होंने सभी से राष्ट्र निर्माण और संस्थागत विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस दौरान एमईआरआई टीवी स्टूडियो में प्रो. वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री का एक विशेष पॉडकास्ट भी रिकॉर्ड किया गया। इसमें उन्होंने अपने जीवन, संस्कृत के क्षेत्र में किए गए कार्यों और भारतीय दर्शन से जुड़े अनुभवों को साझा किया।

गौरतलब है कि प्रो. वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। वे देश के अग्रणी संस्कृत विद्वानों में गिने जाते हैं और अद्वैत वेदांत, दर्शनशास्त्र तथा संस्कृत काव्यशास्त्र के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं।

प्रो. कुटुम्बा शास्त्री वर्तमान में तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती विश्वविद्यालय (SCSVMV) के कुलाधिपति हैं। इससे पहले वे राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के प्रथम कुलपति रह चुके हैं। उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी और श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, वेरावल (गुजरात) में भी कुलपति के रूप में अपनी सेवाएँ दी हैं।

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