युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने की पहल, रोजगारोन्मुखी राष्ट्रीय कार्यक्रम में सरकार के साथ ICMAI की भागीदारी
नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICMAI) ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) में CMA फर्मों को शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रयासों को गति दी है। भारत सरकार की यह प्रमुख पहल युवाओं को संगठित क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर उन्हें बेहतर रोजगार के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखती है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए ICMAI के अध्यक्ष, सीएमए टीसीए श्रीनिवास प्रसाद ने बताया कि सरकार के साथ जारी विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप एक व्यवहारिक ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत CMA फर्मों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा। आवश्यक अनुमोदनों और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के पूर्ण होने के बाद इस पहल को लागू किए जाने की संभावना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र CMA फर्में इंटर्न्स को अवसर प्रदान करेंगी और उन्हें कॉस्ट एवं मैनेजमेंट अकाउंटिंग, कॉस्ट ऑडिट, कराधान, नियामकीय अनुपालन, प्रबंधन परामर्श, वित्तीय सलाहकारी सेवाएं तथा बिज़नेस प्रोसेस सुधार जैसे विविध पेशेवर क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगी।
योजना की प्रस्तावित संरचना के अनुसार, प्रत्येक इंटर्न को प्रतिमाह ₹9,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें से ₹8,100 भारत सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे, जबकि शेष ₹900 संबंधित CMA फर्म या LLP द्वारा दिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का लक्ष्य देशभर की अग्रणी कंपनियों और संस्थानों के माध्यम से पाँच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कार्यक्रम युवाओं को वास्तविक कार्यानुभव और व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करने पर केंद्रित है, ताकि उनकी उद्योग के लिए तैयारियों और रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके।
ICMAI का मानना है कि इस योजना में CMA फर्मों की भागीदारी से छात्रों और युवा पेशेवरों को महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, उद्योग और फर्मों को अनुपालन, गवर्नेंस, कॉस्ट मैनेजमेंट और सलाहकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही, ICMAI ‘कॉरपोरेट मित्र’ कार्यक्रम को लेकर भी सरकार के साथ सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है और अपने सुझाव प्रस्तुत कर चुका है। संस्थान एक ऐसा संरचित प्रशिक्षण मॉडल विकसित कर रहा है, जिसमें कक्षा आधारित शिक्षण और व्यावहारिक औद्योगिक अनुभव का समन्वय हो, ताकि MSME क्षेत्र के लिए उद्योग-तैयार पैरा-प्रोफेशनल्स तैयार किए जा सकें। ये पेशेवर किफायती लागत पर नियामकीय और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में MSMEs की सहायता करेंगे।
देशभर में फैले चार क्षेत्रीय परिषदों और 113 चैप्टर्स के सशक्त नेटवर्क के साथ ICMAI सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को किफायती पेशेवर सेवाएं, अनुपालन सहयोग और व्यावसायिक परामर्श उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्षम है, विशेषकर छोटे शहरों और उभरते व्यावसायिक केंद्रों में।
इन पहलों से पेशेवर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलने, सार्थक रोजगार अवसरों का सृजन होने और कौशल विकास, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा समग्र आर्थिक विकास के सरकार के विज़न को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।