डॉ. राजशेखर ने माउंट डेनाली पर सफल आरोहण कर रचा इतिहास, 7 समिट्स चुनौती पूरी की
हैदराबाद: डॉ. राजशेखर ने माउंट डेनाली की कठिन चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर 7 समिट्स चुनौती पूरी कर ली है। इस उपलब्धि ने उन्हें दक्षिण भारत के पहले ऐसे डॉक्टर के रूप में स्थापित किया है जिन्होंने दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर विजय प्राप्त की है।
डॉ. राजशेखर की यह उपलब्धि केवल पर्वतारोहण का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी भी है। इस पूरे अभियान के दौरान उन्हें ‘बूट्स एंड क्रैम्पॉन’ के संस्थापक भरत थामिनेनी का निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्राप्त हुआ, जिसने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिप और नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के विशेषज्ञ तथा रोबोटिक सर्जन डॉ. राजशेखर ने वर्षों तक हैदराबाद के अग्रणी आर्थोपेडिक विशेषज्ञों के साथ कार्य किया और नई पीढ़ी के सर्जनों को प्रशिक्षित किया। हालांकि कोविड-19 महामारी के दौरान संक्रमित होने के बाद उनका जीवन अप्रत्याशित रूप से बदल गया। संक्रमण गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
कोविड से उबरने के बाद भी चुनौतियां समाप्त नहीं हुईं। लगातार थकान और मानसिक रूप से उत्साह में कमी के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष तक अपने पेशेवर कार्यों से दूरी बनानी पड़ी।
स्वास्थ्य को दोबारा मजबूत बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वयं के लिए एक असाधारण लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने पर्वतारोहण को चुना—एक ऐसा खेल जो शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता की कठोर परीक्षा लेता है—और इसके लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण शुरू किया।
उनकी 7 समिट्स यात्रा की शुरुआत 26 जनवरी 2022 को तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो पर सफल आरोहण से हुई। इसके बाद अगस्त 2022 में उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को भी फतह किया।
इस दौरान कई चोटों का सामना करने के कारण उन्हें लगभग एक वर्ष का विराम लेना पड़ा। वापसी के बाद उन्होंने अगस्त 2023 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोस्यूस्को पर सफलता हासिल की तथा 4 फरवरी 2024 को दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकोंकागुआ के शिखर तक पहुंचे।
कुछ ही महीनों बाद उन्होंने अपने पर्वतारोहण जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हासिल करते हुए 23 मई 2024 को विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया।
माउंट डेनाली पर उनका पहला प्रयास जून 2025 में हुआ था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण शिखर तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। वापसी के दौरान उन्हें फ्रॉस्टबाइट की समस्या का भी सामना करना पड़ा।
हालांकि इस असफलता ने उनके संकल्प को और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने साथी पर्वतारोही कविता के साथ अंटार्कटिका की सर्वोच्च चोटी माउंट विन्सन पर सफल आरोहण कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया।
18 जून 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 8:30 बजे डॉ. राजशेखर ने माउंट डेनाली के शिखर पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अपने लंबे अभियान को ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाया। परिवार को भेजे गए एक वॉयस मैसेज में उन्होंने बताया कि अत्यधिक ठंड और हल्की हवाओं के बावजूद पूरा अभियान सुचारु रूप से संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा, “बिना किसी समस्या के शिखर पर पहुंच गए हैं। हल्की हवा और ठंड जरूर है, लेकिन बाकी सब कुछ ठीक है। कोई चोट नहीं लगी है और पूरी टीम स्वस्थ है।”
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए डॉ. राजशेखर ने कहा, “जीवन में आए तमाम उतार-चढ़ावों के बाद माउंट डेनाली के शिखर पर खड़ा होना मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। इस यात्रा ने मेरी शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर परीक्षा ली, लेकिन इसने मुझे यह भी सिखाया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और उद्देश्य की शक्ति हमें असंभव प्रतीत होने वाली ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। 7 समिट्स पूरा करना केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि स्वस्थ होने का संकल्प और निरंतर प्रयास इंसान को दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंचा सकता है।”
शिखर फतह करने के बाद डॉ. राजशेखर सुरक्षित रूप से लगभग 5,247 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हाई कैंप पहुंचे, जहां पूरी टीम दोबारा एकत्र हुई। अपने संदेश में उन्होंने कहा, “हम कैंप पहुंच चुके हैं और हमारे लीडर सेवांग द्वारा तैयार की जा रही चाय का आनंद लेने के लिए तैयार हैं। कृपया सभी परिजनों और मित्रों को इसकी सूचना दें।”
माउंट डेनाली पर इस सफल आरोहण के साथ डॉ. राजशेखर ने आधिकारिक रूप से 7 समिट्स चुनौती पूरी कर ली है। अब उनका नाम उन चुनिंदा वैश्विक पर्वतारोहियों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलता प्राप्त की है। साथ ही वे दक्षिण भारत के पहले चिकित्सक भी बन गए हैं जिन्होंने यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है।
पर्वतारोहण के अलावा डॉ. राजशेखर अपने संयुक्त परिवार से विशेष प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वे अपने माता-पिता, भाई, दादी और अन्य परिजनों के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी डॉ. हरिप्रिया संक्रामक रोगों की विशेषज्ञ हैं और उनका नौ वर्षीय पुत्र है। परिवार ने उनकी पूरी यात्रा में निरंतर सहयोग और उत्साहवर्धन किया है।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. हरिप्रिया ने कहा, “यह यात्रा वास्तव में असाधारण रही है। एक गंभीर बीमारी से संघर्ष करते हुए दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंचने का उनका सफर हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। एक परिवार के रूप में हमें उनकी दृढ़ता, अनुशासन और साहस पर गर्व है। यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की भी है जिन्होंने हर चुनौतीपूर्ण दौर में उनका साथ दिया।”
एक आर्थोपेडिक डॉक्टर से विश्वस्तरीय पर्वतारोही बनने तक का डॉ. राजशेखर का यह सफर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों से उबरकर भी बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी साहस, संकल्प, संघर्ष और विजय की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी है।