MERI में अंतरराष्ट्रीय आईटी सेमिनार: क्वांटम और साइबर टेक्नोलॉजी पर फोकस

MERI में अंतरराष्ट्रीय आईटी सेमिनार: क्वांटम और साइबर टेक्नोलॉजी पर फोकस

नई दिल्ली, 24 मार्च 2026:

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से संबद्ध मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (MERI) में 21वां अंतरराष्ट्रीय ‘अप्रेंदेमोस’ आईटी सेमिनार आयोजित किया गया। “नेक्स्ट-जन इंटेलिजेंस: क्वांटम, साइबर और इमर्सिव गेमिंग” थीम पर आधारित इस सेमिनार में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, रक्षा विशेषज्ञों तथा रूस और यूरोप सहित विभिन्न देशों से आए अंतरराष्ट्रीय पैनलिस्टों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का उद्घाटन MERI ग्रुप के वाइस चेयरमैन प्रोफेसर ललित अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट रखना चाहिए। उनका कहना था कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए नई टेक्नोलॉजी की समझ बेहद आवश्यक है।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि एवं MERI ग्रुप के चेयरमैन श्री आई. पी. अग्रवाल ने क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमर्सिव गेमिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही है और डिजिटल भविष्य के लिए सुरक्षित एवं बुद्धिमान प्रणालियों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। नैतिकता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “विज्ञान एक अच्छा सेवक है, लेकिन एक बुरा मालिक।”

सेमिनार के तहत विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। क्वांटम कंप्यूटिंग सत्र में एयर वाइस मार्शल (डॉ.) देवेश वत्स, प्रोफेसर विनीत अग्रवाल, पुनीत सिंह, डॉ. आशु गौतम और अमरेंद्र सत्यसीलन ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, साइबर सिक्योरिटी सत्र के दौरान एयर कमोडोर रजनीश कुमार, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) हरकमल सिद्धू, दिमित्री क्लिओंस्की और रितेश कुमार ने साइबर खतरों और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। गेमिंग सत्र में मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एम. एस. मोखा, ब्रिगेडियर डी. एस. बजाज, उदित पवार और डॉ. एस. प्रभु ने इमर्सिव गेमिंग के उभरते आयामों पर प्रकाश डाला।

इसी के साथ “जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी एंड इट्स रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशंस” तथा “साइबर सिक्योरिटी ऑडिट: द फाइन आर्ट ऑफ कंप्लायंस इन द एरा ऑफ एआई एंड क्लाउड सिक्योरिटी” विषयों पर कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का समापन MERI की डीन डॉ. दीपशिखा कालरा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह सेमिनार अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी से संबंधित वैश्विक ज्ञान-विनिमय और व्यावहारिक सीख का एक प्रभावी मंच साबित हुआ।

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