तेलंगाना के तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने माउंट एवरेस्ट पर लहराया जीत का परचम

तेलंगाना के तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने माउंट एवरेस्ट पर लहराया जीत का परचम

फिटनेस से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने वाले तुलसी रेड्डी की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा

दिल्ली/हैदराबाद: जहां माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना कई लोगों के लिए सिर्फ एक सपना होता है, वहीं भारतीय पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने इसे अपनी मेहनत, अनुशासन और हौसले से हकीकत में बदल दिया।

तेलंगाना के हैदराबाद स्थित कुतबुल्लापुर मंडल के बोवरामपेट गांव के रहने वाले तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने वर्षों की तैयारी, कठिन ट्रेनिंग और लगातार मेहनत के बाद सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की है।

तुलसी की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसकी शुरुआत बहुत साधारण तरीके से हुई। एक समय खाने-पीने के शौकीन रहे तुलसी ने फिट रहने के लिए जिम जाना शुरू किया। धीरे-धीरे फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल उनके लिए जुनून बन गई और उन्होंने एंड्योरेंस स्पोर्ट्स और पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा। समय के साथ उन्होंने कई लोकल रन, कठिन आयरनमैन चैलेंज और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई हाई-एल्टीट्यूड अभियानों को पूरा किया।

इस दौरान तुलसी ने दुनिया की कई कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की, जिनमें शामिल हैं:

  • माउंट एल्ब्रस (5,642 मीटर) — यूरोप की सबसे ऊंची चोटी
  • एकोंकागुआ (6,961 मीटर) — दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी
  • माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) — अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी
  • कांग यात्से-१ (6,400 मीटर)
  • कांग यात्से-२ (6,250 मीटर)
  • ड्जो जोंगो (करीब 6,240 मीटर)
  • हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में कई हाई-एल्टीट्यूड अभियान
  • लोबुचे ईस्ट (6,119 मीटर)

तुलसी ने कहा, “एवरेस्ट तक पहुंचना कई सालों के अनुशासन, त्याग और लगातार तैयारी का नतीजा है। इस सफर में मेरा साथ देने वाले हर व्यक्ति का इसमें योगदान है।”

उन्होंने अपने परिवार, शेरपा टीम, दोस्तों और “बूट्स एंड क्रैम्पॉन्स” के अभियान गाइड्स भरत थाम्मिनेनी और रोमिल बर्थवाल का खास तौर पर धन्यवाद किया।

परिवार ने कहा, “आज हमारे परिवार के लिए सबसे गर्व के पलों में से एक है। वर्षों की मेहनत, हिम्मत और संघर्ष के बाद तुलसी दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे हैं।”

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