नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए AI कंपनी Anthropic ने अपने एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी मॉडल Claude Mythos का एक्सेस भारत की चुनिंदा कंपनियों को देने की शुरू कर दिया है।
यह पहल कंपनी के Project Glasswing कार्यक्रम के विस्तार का हिस्सा है, जिसके तहत दुनिया के कई देशों की कुछ संस्थाओं को इस विशेष AI मॉडल तक पहुंच प्रदान की जा रही है।
साइबर सुरक्षा का मानना है कि यह कदम भारतीय IT और डिजिटल इंफ्रासट्रक्चर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि Claude Mythos को जटिल साइबर कमजोरियों की पहचान करने और सुरक्षा खामियों का विश्लेषण करने के लिए विकसित किया गया है।
क्या है Claude Mythos?
Claude Mythos, Anthropic द्वारा विकसित एक उन्नत AI मॉडल है जिसे विशेष रूप से साइबर सुरक्षा अनुसंधान और सुरक्षा परीक्षण के लिए तैयार किया गया है। कंपनी ने इसे अप्रैल 2026 में पेश किया था।
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद ऐसी कमजोरियों की पहचान कर सकता है, जिनका पहले पता नहीं चला हो। तकनीकी भाषा में इन्हें “Zero-Day Vulnerabilities” कहा जाता है। इसके अलावा यह पुराने सॉफ्टवेयर में मौजूद लंबे समय से अनदेखी सुरक्षा खामियों का भी पता लगाने में सक्षम बताया जा रहा है।
Anthropic का कहना है कि इस मॉडल का उद्देश्य संगठनों को संभावित साइबर खतरों की पहचान करने और समय रहते उन्हें ठीक करने में मदद करना है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत दुनिया के सबसे बड़े IT सेवा बाजारों में से एक है। देश की कई बड़ी टेक कंपनियां वैश्विक स्तर पर बैंकिंग, हेल्थकेयर, क्लाउड और सरकारी संस्थानों को डिजिटल सेवाएं प्रदान करती हैं।
ऐसे में Claude Mythos जैसे उन्नत साइबर सुरक्षा टूल की उपलब्धता भारतीय कंपनियों को अपने सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने में मदद कर सकती है।
इससे कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने के साथ-साथ बढ़ते साइबर हमलों से भी अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित सुरक्षा तकनीकों की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी और इस क्षेत्र में शुरुआती पहुंच भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।

Project Glasswing का दायरा बढ़ा
Anthropic ने Project Glasswing की शुरुआत 2026 में की थी। प्रारंभिक चरण में इस कार्यक्रम में कुछ चुनिंदा वैश्विक तकनीकी और अनुसंधान संस्थानों को शामिल किया गया था।
अब कंपनी ने इस पहल का विस्तार करते हुए 15 से अधिक देशों की लगभग 150 संस्थाओं को इसमें शामिल किया है। भारत भी इस विस्तारित सूची का हिस्सा बना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्यक्रम में शामिल संगठनों को रिसर्च और परीक्षण कार्यों के लिए विशेष उपयोग क्रेडिट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सुरक्षा और जोखिम दोनों मौजूद
हालांकि Claude Mythos को साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, लेकिन इसकी उन्नत क्षमताओं को देखते हुए इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।
इसी कारण Anthropic ने इसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया है। कंपनी केवल चुनिंदा और विश्वसनीय संगठनों को ही नियंत्रित वातावरण में इसका एक्सेस दे रही है।
कंपनी का मानना है कि इस तरह की तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और उचित निगरानी के साथ ही किया जाना चाहिए।
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भारत के डिजिटल भविष्य के लिए अवसर
डिजिटल सेवाओं और साइबर सुरक्षा पर बढ़ती निर्भरता के बीच Claude Mythos का भारत पहुंचना एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए तो यह भारतीय कंपनियों को वैश्विक साइबर सुरक्षा मानकों के और करीब ला सकता है।
आने वाले समय में AI आधारित सुरक्षा समाधान साइबर खतरों से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और Claude Mythos इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।