पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कम क्यों होते हैं हार्ट अटैक? जानिए चौंकाने वाली वजह

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कम क्यों होते हैं हार्ट अटैक? जानिए चौंकाने वाली वजह

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले कम क्यों होते हैं? जानिए एस्ट्रोजन हार्मोन, लाइफस्टाइल और शरीर से जुड़े अहम कारण, साथ ही महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण और बचाव के आसान तरीके

नई दिल्ली: आजकल हार्ट अटैक एक आम समस्या बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और गलत खान-पान के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन कई अध्ययन बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के मामले पुरुषों की तुलना में कम देखे जाते हैं। आइए जानते हैं इसका कारण।

हार्ट अटैक क्या होता है?

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है। इससे दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और दिल को नुकसान हो सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

महिलाओं में कम क्यों होता है हार्ट अटैक?

  1. हार्मोन एस्ट्रोजन का असर

    महिलाओं में हार्ट अटैक कम होने का सबसे बड़ा कारण उनका हार्मोन एस्ट्रोजन (Estrogen) है। यह हार्मोन शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है। इससे दिल की धमनियां ज्यादा समय तक स्वस्थ रहती हैं और ब्लॉकेज का खतरा कम होता है।
  2. शरीर में फैट का जमा होना

पुरुषों के शरीर में फैट ज्यादातर पेट के आसपास जमा होता है, जिसे “विसरल फैट” कहा जाता है। यह दिल के लिए ज्यादा खतरनाक होता है। वहीं महिलाओं में फैट आमतौर पर कूल्हों और जांघों में जमा होता है, जो अपेक्षाकृत कम खतरनाक माना जाता है।

  1. लाइफस्टाइल का फर्क

हालांकि अब स्थिति बदल रही है, लेकिन पारंपरिक तौर पर पुरुषों में धूम्रपान, शराब और तनाव का स्तर ज्यादा देखा गया है।
ये सभी कारक हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके मुकाबले महिलाओं में पहले यह आदतें कम थीं, जिससे उनका जोखिम भी कम रहा।

  1. मेनोपॉज के बाद बदलाव

महिलाओं में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) से पहले तक एस्ट्रोजन हार्मोन उन्हें काफी हद तक सुरक्षा देता है।
लेकिन जैसे ही मेनोपॉज होता है, एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है और इसके बाद महिलाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है।

क्या महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं?

महिलाएं हार्ट अटैक से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड, मोटापा और तनाव की वजह से अब महिलाओं में भी हार्ट डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं। खासकर 40–50 साल की उम्र के बाद यह खतरा ज्यादा होता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से थोड़ा अलग हो सकते हैं, जैसे:
• सीने में हल्का दर्द या दबाव
• बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी
• सांस लेने में परेशानी
• जी मिचलाना या उल्टी जैसा लगना
• पीठ या जबड़े में दर्द
इसी वजह से कई बार महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं, जो खतरनाक हो सकता है।

कैसे कम करें हार्ट अटैक का खतरा?

हार्ट अटैक से बचने के लिए पुरुष और महिलाएं दोनों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
• रोज कम से कम 30-40 मिनट कोई भी व्यायाम करें – वॉकिंग, योगा या जिम
• संतुलित और हेल्दी डाइट लें
• धूम्रपान और शराब से दूर रहें
• तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करें
• नियमित हेल्थ चेकअप कराएं

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