प्रभावी संवाद की कुंजी है कॉपीराइटिंग: UICA में मनोज शर्मा का व्याख्यान

प्रभावी संवाद की कुंजी है कॉपीराइटिंग: UICA में मनोज शर्मा का व्याख्यान

कॉपीराइटिंग के मूल सिद्धांतों से लेकर डिजिटल युग में प्रभावी लेखन तक छात्रों को मिला व्यावहारिक मार्गदर्शन

अहमदाबाद: संचार के बदलते स्वरूप के बीच, मनोज शर्मा ने UICA में कॉपीराइटिंग पर व्याख्यान देते हुए इसे लोगों से जुड़ने का सशक्त माध्यम बताया।

लेक्चर की शुरुआत कॉपीराइटिंग की बुनियादी समझ से हुई, जिसमें इसकी परिभाषा, उद्देश्य और प्रकार को आसान तरीके से समझाया गया। इसके बाद ऑडियंस को समझने पर जोर दिया गया। मनोज शर्मा ने बताया कि केवल उम्र या जगह की जानकारी काफी नहीं होती, बल्कि लोगों की सोच, पसंद और व्यवहार को समझना भी जरूरी है। उन्होंने आगे समझाया कि अच्छा लिखने के कुछ साफ और आसान नियम होते हैं, जो प्रिंट, डिजिटल, टीवी और सोशल मीडिया—हर जगह काम आते हैं, और खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, जहां लोगों का ध्यान जल्दी हट जाता है, वहां संदेश छोटा, साफ और सीधे समझ आने वाला होना चाहिए।

लेक्चर के दौरान छात्रों को लिखने के प्रैक्टिकल तरीके भी सिखाए गए। इसमें अच्छी हेडलाइन और टैगलाइन बनाना, कंटेंट को सही ढंग से लिखना और ऐसा कॉल टू एक्शन तैयार करना शामिल था, जिससे लोग तुरंत प्रतिक्रिया दें। साथ ही विज्ञापन, ब्रोशर, वेबसाइट और ईमेल कैंपेन जैसे अलग-अलग फॉर्मेट्स पर भी चर्चा हुई। हर प्लेटफॉर्म पर एक जैसा ब्रांड टोन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

मनोज शर्मा ने कॉपीराइटिंग में ईमानदारी और जिम्मेदारी की बात भी रखी। उन्होंने कहा कि अच्छा संदेश वही होता है जो सही और भरोसेमंद हो।

उन्होंने कहा, “कॉपीराइटिंग सिर्फ लिखने का काम नहीं है, बल्कि लोगों को समझने का तरीका है। साफ भाषा, सही उद्देश्य और भरोसा ही तय करता है कि संदेश लोगों तक कितनी अच्छी तरह पहुंचेगा।”

UICA के डीन प्रोफेसर नवीन लूथरा ने कहा कि इस लेक्चर से छात्रों को यह समझने में मदद मिली कि असल काम में कॉपीराइटिंग कैसे इस्तेमाल होती है। उन्होंने कहा कि संचार में लिखना सीधे तौर पर ऑडियंस की समझ से जुड़ा होता है।

लेक्चर में शामिल छात्रों ने इसे उपयोगी बताया। ध्वनि भाटिया ने कहा कि इससे उन्हें समझ आया कि भाषा लोगों की सोच और प्रतिक्रिया को कैसे प्रभावित करती है। वहीं कुसुम कटारिया ने कहा कि टोन और स्ट्रक्चर पर हुई चर्चा डिजिटल और सोशल मीडिया के लिए बहुत काम की रही।

लेक्चर के अंत में एक अभ्यास कराया गया, जिसमें छात्रों ने एक-दूसरे के काम को देखा, समझा और उसमें सुधार के सुझाव दिए।

More From Author

बिना डॉक्टर की सलाह के Eye drops का इस्तेमाल खतरनाक

बिना डॉक्टर की सलाह के Eye drops का इस्तेमाल खतरनाक, आंखों की रोशनी पर पड़ सकता है असर

लाइट्स, कैमरा, एक्शन: MERI के दो दिवसीय प्रायोगिक आयोजन से छात्रों ने सीखी मीडिया की बारीकियां

MERI के पत्रकारिता विभाग की पहल, दो दिवसीय गतिविधि से छात्रों को मिला मीडिया का वास्तविक अनुभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

क्रिप्टो

ब्रिटेन की नई क्रिप्टो नीति से भारत को मिला बड़ा संकेत

नई दिल्ली, 25 मई 2026 ब्रिटेन ने क्रिप्टो को लेकर अपने रवैये में बड़ा बदलाव किया है। जिसे कभी जोखिम भरा और अस्थिर क्षेत्र माना जाता था, अब उसे मुख्यधारा की वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है। ब्रिटेन...