रायबरेली में गांधी परिवार की रिटायरमेंट: क्या कांग्रेस की यूपी में स्थिति जीरो पर होगी?

“गांधी परिवार की चुनाव तकनीक: क्या अमेठी और रायबरेली सीटों पर होगा विरोध?”

19 मार्च 2024

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच उत्तर प्रदेश में गठबंधन की घोषणा ने राजनीतिक मैदान में एक बड़ी चर्चा को जन्म दिया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ना है। अमेठी और रायबरेली की सीटों को बचाने के लिए कांग्रेस ने समझौता किया है, जिसमें 17 सीटों पर सपा के साथ समझौता किया गया है। इसके बाद से उम्मीदवारों का चयन करने के लिए वार्ता जारी है, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि चुनाव की घोषणा हो चुकी है।

25 साल पहले सोनिया गांधी ने अमेठी से सांसद के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उन्हें चुनावी मैदान में नहीं देखा जाएगा। रायबरेली और अमेठी सीट से गांधी परिवार के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। यदि गांधी परिवार इस बार अमेठी और रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ता है, तो कांग्रेस को यूपी में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन करने के बावजूद भी अपनी स्थिति को मजबूत नहीं बनाया है। कांग्रेस की 17 सीटों में से कुछ ऐसी हैं, जहां पार्टी ने बहुत समय से जीत नहीं पा रही है। इससे कांग्रेस की चुनावी रणनीति में संदेह और चुनौती का सामना है।

कांग्रेस की सबसे मजबूत सीटों में रायबरेली और अमेठी शामिल हैं, लेकिन इस बार गांधी परिवार अपने परंपरागत सीटों से चुनाव नहीं लड़ रहा है। यह चुनौती कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेठी और रायबरेली के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी के पक्ष में जाकर काफी प्रभाव बनाया है। इससे कांग्रेस के लिए चुनौती का सामना है।

इस गठबंधन के बावजूद, कांग्रेस के लिए यूपी में चुनौती से निपटना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन को मजबूत करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि वह चुनाव में प्रभावी रूप से उत्तर सके।

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