राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर केंद्रित रहा अखिल भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय सम्मेलन

राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर केंद्रित रहा अखिल भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय सम्मेलन

देशभर से आए प्रतिनिधियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

नई दिल्ली: रविवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हॉल में अखिल भारतीय जनसंघ द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 126वीं जयंती पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रवादी विचारों, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन अखिल भारतीय जनसंघ के असम प्रदेश अध्यक्ष एवं सम्मेलन संयोजक रुगेश्वर खंडवाल ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं देशभर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद संगठन का इतना बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ है, जिसमें विभिन्न राज्यों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद प्रफुल द्वारकादास गोराडिया रहे। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व आधारित राष्ट्र चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की मूल विचारधारा समाज को जोड़ने वाली है। उन्होंने अपनी नई पुस्तक “राम राज्य” का भी उल्लेख किया और कहा कि यह भारतीय शासन व्यवस्था की अवधारणा को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ. भारत भूषण पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

अपने स्वागत भाषण में रुगेश्वर खंडवाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का व्यक्तित्व और कृतित्व देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी तथा असम सरकार से अपील करते हुए कहा कि समान विचारधारा वाले संगठनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है तथा अखिल भारतीय जनसंघ की ऐतिहासिक भूमिका और योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय महामंत्री देश कुमार कौशिक, राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री ए. जे. शर्मा, वी. के. रामनरेन्द्री, सुधेश भारद्वाज, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कुंदी पांडेय, जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष डॉ. भारत रोशन पांडेय, गुजरात से गोपालभाई पटेल, अश्विनी दत्ता, अनिल कुमार शर्मा, संतोष तिवारी, डॉ. मोनिका राठौर, डॉ. सुरेश भारद्वाज, डॉ. ज्योति यात्री, डॉ. गोल्डी खन्ना, डॉ. रवि श्रीवास्तव, सी. एस. राव सहित विभिन्न राज्यों से आए अनेक राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, शिक्षा, सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए जो योगदान दिया, वह भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

सम्मेलन में दिल्ली, असम, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात सहित देश के अनेक राज्यों से आए प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण दोहराते हुए भारत माता की जय और अखिल भारतीय जनसंघ के उद्घोष के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

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