नई दिल्ली: पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जुड़ी नीति, ई-केवाईसी सत्यापन और कमीशन में संशोधन जैसे मुद्दों पर एलपीजी वितरकों ने सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन किया। सीबीडी ग्राउंड में आयोजित इस प्रदर्शन में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 4,000 से अधिक वितरक पहुंचे।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा ने कहा कि वितरक लंबे समय से कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि एलपीजी की कीमतों और परिचालन लागत में बढ़ोतरी के बावजूद कमीशन में उसी अनुपात में संशोधन नहीं हुआ है।
शर्मा ने घरेलू और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा कमीशन व्यवस्था कारोबार पर पड़ने वाले खर्च का पर्याप्त ध्यान नहीं रखती। उनके अनुसार, कमीशन में संशोधन की जरूरत का आकलन करने के लिए किए गए अध्ययन के बाद 2022 में अंतरिम राहत दी गई थी, लेकिन व्यापक बदलाव की मांग अभी लंबित है।
एसोसिएशन ने 24 मार्च 2026 को जारी सरकारी आदेश पर भी आपत्ति जताई। संगठन के मुताबिक, यह आदेश उन क्षेत्रों में एलपीजी आपूर्ति बंद करने से संबंधित है, जहां PNG का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। एसोसिएशन का तर्क है कि इस नीति से वितरकों के कारोबार पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
प्रदर्शन में ई-केवाईसी सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण करीब 3.16 करोड़ एलपीजी कनेक्शन निलंबित किए जाने का दावा भी उठाया गया। शर्मा ने बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख किया। हालांकि, कनेक्शनों की संख्या और कानूनी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
एसोसिएशन ने तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों पर वितरकों के काम में हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया। संगठन के अनुसार, गैस की मांग से जुड़े इंडेंट में बदलाव से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वितरकों ने गैस चूल्हे, रबर ट्यूब, लाइटर और एप्रन जैसे उत्पाद बेचने के लिए कथित दबाव की शिकायत भी की।
प्रदर्शनकारियों ने आयोजन स्थल पर बैरिकेडिंग और आवागमन से जुड़ी पाबंदियों के कारण हुई परेशानियों का मुद्दा भी उठाया।
एसोसिएशन ने सरकार से एक महीने के भीतर कमीशन में संशोधन, PNG नीति की समीक्षा, कनेक्शन संबंधी मुद्दों और परिचालन समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा ने कहा कि समयसीमा के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो देशव्यापी हड़ताल की जा सकती है।