स्टील और निर्माण सामग्री के विस्तार को नई दिशा देगा ‘बिल्ड कनेक्ट 2026’, डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क पर रहेगा विशेष फोकस

स्टील और निर्माण सामग्री के विस्तार को नई दिशा देगा ‘बिल्ड कनेक्ट 2026’, डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर नेटवर्क पर रहेगा विशेष फोकस

तेजी से बढ़ती स्टील उत्पादन क्षमता और ट्रेड आधारित वितरण की भूमिका के बीच, बिल्ड कनेक्ट 2026 उद्योग के डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर इकोसिस्टम को सशक्त करने का राष्ट्रीय मंच बनेगा।

नई दिल्ली | 15 जनवरी, 2026

भारत का स्टील और निर्माण सामग्री उद्योग तेज़ी से विकास के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उत्पादन क्षमता में निरंतर इज़ाफ़ा और घरेलू मांग की मजबूती ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है। उद्योग अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत का स्टील उत्पादन 160 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर चुका है, जबकि वर्ष 2030 तक स्थापित क्षमता के लगभग 300 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है।

इसी तरह, बुनियादी ढाँचा और आवास परियोजनाओं में निरंतर निवेश के चलते सीमेंट क्षेत्र में भी क्षमता विस्तार की प्रक्रिया तेज़ हो गई है।

जैसे-जैसे उत्पादन का पैमाना बढ़ रहा है, उद्योग का ध्यान अब केवल निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इस बढ़ी हुई क्षमता को बाज़ार तक कुशलतापूर्वक पहुँचाने पर भी केंद्रित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वितरण नेटवर्क उद्योग की सतत वृद्धि का अहम आधार बनेगा।

उद्योग आकलन बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 में भारत में तैयार स्टील की खपत लगभग 162 मिलियन टन रही, जिसमें से करीब 50 मिलियन टन स्टील डीलर, डिस्ट्रिब्यूटर, स्टॉकिस्ट और यार्ड जैसे ट्रेड आधारित चैनलों के ज़रिए बाज़ार में पहुँचा। ये नेटवर्क मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा संचालित किए जाते हैं।

2030 तक कुल स्टील मांग के लगभग 210 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है, वहीं ट्रेड आधारित वितरण के माध्यम से होने वाली आपूर्ति बढ़कर लगभग 70 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो सकती है। यह वृद्धि टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार, वैल्यू ऐडेड स्टील उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी और वितरण ढाँचे के क्रमिक आधुनिकीकरण से प्रेरित मानी जा रही है।

इन्हीं रुझानों को ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित कर्टन रेज़र प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘बिल्ड कनेक्ट 2026’ की औपचारिक घोषणा की गई। यह राष्ट्रीय स्तर का एक्सपो और कॉन्फ्रेंस स्टील व निर्माण सामग्री उद्योग के डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर इकोसिस्टम को मज़बूत करने पर केंद्रित रहेगा।

वितरण नेटवर्क की बढ़ती भूमिका


कॉन्फ्रेंस के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जैसे-जैसे उत्पादों की विविधता और वॉल्यूम बढ़ते हैं, वैसे-वैसे वितरण क्षमता, भौगोलिक पहुँच और संचालन की दक्षता उद्योग के लिए निर्णायक कारक बनती जा रही हैं। अनुमान के अनुसार, ट्रेड चैनलों के माध्यम से हर साल लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य की स्टील और निर्माण सामग्री की बिक्री होती है। यह आँकड़ा संगठित वित्त, बेहतर तरलता प्रबंधन और स्मार्ट इन्वेंट्री सिस्टम की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

बिल्ड कनेक्ट 2026 का उद्देश्य


बिल्ड कनेक्ट 2026 को देश का पहला ऐसा व्यापक मंच बताया गया है, जो डीलर–डिस्ट्रिब्यूटर, स्टील मिल, निर्माता, ईपीसी कंपनियाँ, आर्किटेक्ट, वित्तीय संस्थान और तकनीकी सेवा प्रदाताओं को एक साथ जोड़ेगा। यह आयोजन अखिल भारतीय स्तर पर नेटवर्किंग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देगा। साथ ही, डिजिटल टूल्स, वैल्यू ऐडेड उत्पादों और संरचित वित्तीय समाधानों से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया जाएगा।

इस आयोजन में 300 से अधिक डिस्ट्रिब्यूटर और 3,000 से ज़्यादा एमएसएमई स्तर के डीलरों की भागीदारी की उम्मीद है, जो भारत के ट्रेड आधारित वितरण नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया


प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए अंबा शक्ति समूह के चेयरमैन कमल गोयल ने कहा कि बढ़ती उत्पादन क्षमता और वैल्यू ऐडेड उत्पादों के दौर में एक मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार वितरण नेटवर्क उद्योग के लिए बेहद आवश्यक है।

वहीं, बिल्ड कनेक्ट 2026 के आयोजक सुमित अग्रवाल ने कहा कि भारत का विस्तार करता उत्पादन आधार उद्योग को यह अवसर देता है कि वह निर्माण के साथ-साथ अपने वितरण ढाँचे को भी आधुनिक बनाए।

अखिल भारतीय लोहा व्यापार संघ के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने इसे एमएसएमई स्तर के डीलर–डिस्ट्रिब्यूटरों के लिए पहचान, सीख और आगे बढ़ने का एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बताया।

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