महाकुंभ

डॉ. के.ए. पॉल ने महाकुंभ भगदड़ पर सरकार को घेरा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी

नई दिल्ली स्थित आंध्र भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. के.ए. पॉल ने सरकार पर करारा हमला बोलते हुए महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की घोषणा की, ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

डॉ. पॉल ने धार्मिक आयोजनों में VIP संस्कृति और भ्रष्टाचार पर भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव न हो।

“सत्ता का यह दुरुपयोग अब नहीं चलेगा! आम लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, और कुछ विशेष लोग सरकारी सुविधाओं का आनंद उठा रहे हैं। क्या वे सोचते हैं कि स्वर्ग में भी उन्हें यही विशेषाधिकार मिलेंगे?” डॉ. पॉल ने सवाल उठाया।

उन्होंने सरकार की निष्क्रियता और अव्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह त्रासदी टाली जा सकती थी। “यह घटना सरकार की लापरवाही का नतीजा है। अब बदलाव लाने की जरूरत है, ताकि आम जनता सुरक्षित रह सके,” उन्होंने कहा।

डॉ. पॉल की जनहित याचिका में तीन प्रमुख मांगें शामिल हैं—

  1. घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को दंडित किया जाए।
  2. जिम्मेदार अधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए।
  3. धार्मिक आयोजनों में VIP संस्कृति को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

“जो नुकसान हुआ, वह सरकार की लापरवाही का नतीजा है। अब न्याय मिलना चाहिए,” उन्होंने कहा।

तेलुगू राज्यों की अनदेखी पर भी उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. पॉल ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया और आगामी केंद्रीय बजट में कुछ अहम वित्तीय मांगें रखीं—

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट के लिए ₹35,000 करोड़ – कर्ज की बजाय सीधी फंडिंग हो।
अमरावती के विकास हेतु ₹25,000 करोड़ – राजधानी निर्माण को प्राथमिकता मिले।
पोलावरम परियोजना के लिए ₹25,000 करोड़ – दो दशक से लंबित कार्य जल्द पूरा हो।
तेलुगू राज्यों के 28,000 गांवों के लिए ₹28,000 करोड़ – ग्रामीण विकास के अधूरे वादों को पूरा किया जाए।

“सरकार ने गांवों के विकास का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ,” डॉ. पॉल ने कहा।

न्याय और जवाबदेही की मांग

डॉ. पॉल की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। उनके सख्त रुख और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ उनके बयान ने मीडिया और जनता का ध्यान आकर्षित किया।

“यह लड़ाई सिर्फ तेलुगू राज्यों के लिए नहीं है, बल्कि हर भारतीय के लिए है, जो इस तंत्र की वजह से धोखा खा रहा है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से PIL पर जल्द सुनवाई की अपील की और आम जनता से न्याय के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। “हम तब तक आवाज उठाते रहेंगे, जब तक लोगों को उनका हक नहीं मिल जाता,” उन्होंने कहा।

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