27वें कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को किया गया नमन, वीर नारियों का सम्मान और राष्ट्रीय एकता का आह्वान

27वें कारगिल विजय दिवस पर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को किया गया नमन, वीर नारियों का सम्मान और राष्ट्रीय एकता का आह्वान

मेजर संजय मेहरोत्रा ने कहा— “हम साउथ इंडियन या नॉर्थ इंडियन नहीं, बल्कि इंडियन साउथ और इंडियन नॉर्थ हैं”; युवाओं से शहीदों के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

अंबाला कैंट: कारगिल युद्ध के अमर शहीदों की स्मृति को नमन करते हुए अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद (ABPSSP) ने अंबाला कैंट के राजपूत धर्मशाला, किस्मत नगर में 27वें कारगिल विजय दिवस का आयोजन श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति के साथ किया। “शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले…” की भावनाओं से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना, मां भारती की आराधना करना तथा वीर नारियों का सम्मान करना था। आयोजन में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर राष्ट्र के प्रति अपनी आस्था और कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम का संचालन कैप्टन अमरजीत लाल शर्मा, सूबेदार मेजर कृष्णलाल शर्मा, पेटी ऑफिसर जगदीप शर्मा, मातृशक्ति अध्यक्ष उषा चंदेल, संतोष शर्मा, हवलदार के.पी. राणा तथा सूबेदार एम.पी. सिंह ने किया। कार्यक्रम हरियाणा के वाइस प्रेसिडेंट कर्नल हिम्मत सिंह कौशल के नेतृत्व में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि राजीव शर्मा लाडी तथा भारत-भारती के नेशनल ट्रेजरर मेजर संजय मेहरोत्रा एवं उत्तर भारत के संयोजक याज्ञबल्क शर्मा ने कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति दर्ज कराते हुए देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सैनिकों के सम्मान का संदेश दिया।

इस अवसर पर गांव सुंदरपुर, जिला रोहतक के कारगिल वीर शहीद लांस नायक विजय सिंह कुंडू को सैकड़ों पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद के पिता एवं सेवानिवृत्त अध्यापक श्री जीतराम कुंडू, सरपंच प्रवीन कुमार, नायक याज्ञबल्क शर्मा, सूबेदार मेजर नरेश कुमार, सूबेदार मेजर बालकिशन शर्मा तथा हवलदार बलवान सिंह को विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान फौजी कलाकार याज्ञबल्क शर्मा ने शहीद विजय सिंह कुंडू की वीरता और अंतिम बलिदान को समर्पित एक मार्मिक काव्य प्रस्तुति दी। “गौरी लिख भेजूं संदेश, तूं मत करिए आंदेश, ये ही फर्ज था मेरा, कि मैं तो देश पर मरा…” जैसी पंक्तियों ने उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम कर दीं और पूरे सभागार को भावुक कर दिया।

अपने संबोधन में मेजर संजय मेहरोत्रा ने कहा कि भारत की पहचान उत्तर या दक्षिण से नहीं, बल्कि भारतीय होने से है। उन्होंने कहा, “हम साउथ इंडियन या नॉर्थ इंडियन नहीं, बल्कि इंडियन साउथ और इंडियन नॉर्थ हैं। ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संदेश देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।” वक्ताओं ने युवाओं से शहीदों के आदर्शों को आत्मसात करने तथा राष्ट्र सेवा और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों एवं पूर्व सैनिकों के लिए जलपान एवं सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई। आयोजन को सफल बनाने में अनेक दानवीरों ने अपनी स्वेच्छा से सहयोग प्रदान किया। दिल्ली के समाजसेवी अनुज गर्ग ने ₹2,100 की सहयोग राशि भेजकर देशभर के सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ, जहां सभी ने शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को सदैव स्मरण रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने का संकल्प लिया।

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