डॉ. के.ए. पॉल अंतिम क्षणों में निभा रहे निर्णायक भूमिका; निमिषा प्रिया की फांसी से पहले केवल 32 घंटे बचे, चमत्कारी प्रगति के बीच बढ़ी उम्मीदें

डॉ. के.ए. पॉल अंतिम क्षणों में निभा रहे निर्णायक भूमिका; निमिषा प्रिया की फांसी से पहले केवल 32 घंटे बचे, चमत्कारी प्रगति के बीच बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली, 14 जुलाई 2025:

प्रसिद्ध वैश्विक शांति-दूत और मानवतावादी डॉ. के.ए. पॉल यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को रोकने के लिए कूटनीतिक और आध्यात्मिक स्तर पर अंतिम प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं। 16 जुलाई को निर्धारित फांसी से अब महज़ 32 घंटे शेष हैं, और इसी बीच 95% तक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह सफलता हूती नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से उच्चस्तरीय बैठकों के परिणामस्वरूप सामने आई है।

“ईश्वर चमत्कार कर रहे हैं,” डॉ. पॉल ने सना (यमन) से बताया। “जो असंभव था, अब संभव होता दिखाई दे रहा है। पहली बार, हूती पक्ष और राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी की सरकार, दोनों ही मानवीय समाधान पर सहमति जताने को तैयार दिख रहे हैं।”

2017 से सना सेंट्रल जेल में बंद निमिषा प्रिया को एक जटिल और विवादित मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। 16 जुलाई को प्रस्तावित फांसी की पुष्टि के बाद से दुनियाभर में दया याचिकाओं और प्रार्थनाओं की लहर दौड़ पड़ी है।

डॉ. पॉल ने इस प्रगति को “असाधारण साहस” का प्रतीक बताते हुए कहा कि पीड़ित तालाल महदी के परिजनों ने सैद्धांतिक रूप से निमिषा को क्षमा करने पर सहमति जताई है। इस वक्त निमिषा की मां खुद सना में मौजूद हैं, और दुनियाभर से शांति और विश्वास की भावना रखने वाले हजारों लोग इस प्रयास में उनके साथ हैं।

“सरकारें जहाँ रुक जाती हैं, वहाँ ईश्वर रास्ता बनाते हैं,” डॉ. पॉल ने कहा। “हम निर्णायक क्षणों में हैं। यही समय है प्रार्थना, एकता और करुणा का। हमें शांति से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए, शेष ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देना चाहिए। कोशिश और प्रार्थना करने में क्या बुराई है?”

डॉ. पॉल फिलहाल क्षेत्र में मौजूद हैं और दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व के साथ निर्णायक वार्ताएं कर रहे हैं। इस संघर्ष में स्थानीय चर्च और सिविल सोसाइटी के नेताओं ने भी मौन प्रार्थनाओं और रणनीतिक समर्थन के रूप में सहभागिता निभाई है।

हालांकि, कुछ नाम और विवरण राजनयिक संवेदनशीलता के चलते सार्वजनिक नहीं किए जा रहे, लेकिन स्थिति अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। अंतिम निर्णय अब यमन की दोनों सरकारों और पीड़ित परिवार पर निर्भर है, लेकिन आशा की किरण प्रबल हो रही है।

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