Sleep Quality vs Sleep Quantity पूरी नींद के बाद भी थकान क्यों रहती है

Sleep Quality vs Sleep Quantity: पूरी नींद के बाद भी थकान क्यों रहती है?

leep Quality vs Sleep Quantity

नई दिल्ली: कई लोगों की शिकायत होती है कि पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर सुस्ती, थकान और ऊर्जा की कमी बनी रहती है। अक्सर लोग इसे काम का दबाव, मौसम का असर या बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस हो रही है, तो यह शरीर का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। कई बार इसके पीछे नींद की गुणवत्ता, पोषण की कमी, मानसिक तनाव या कोई छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या जिम्मेदार हो सकती है।

सिर्फ घंटों की नहीं, नींद की गुणवत्ता भी जरूरी

अधिकांश लोग मानते हैं कि यदि उन्होंने 7 से 8 घंटे सो लिया तो शरीर पूरी तरह आराम कर चुका होगा। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। नींद केवल समय की नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता की भी होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार नींद कई चरणों में पूरी होती है। इनमें हल्की नींद, गहरी नींद और REM (Rapid Eye Movement) नींद शामिल हैं। गहरी नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है, जबकि REM नींद मस्तिष्क को आराम देने और याददाश्त मजबूत करने में मदद करती है।

यदि किसी कारण से ये दोनों चरण प्रभावित हो जाएं, तो व्यक्ति को पर्याप्त समय तक सोने के बावजूद आराम महसूस नहीं होता।

राकेश की कहानी: जब पूरी नींद भी नहीं दे सकी राहत

दिल्ली में रहने वाले 24 वर्षीय राकेश एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि वह रोजाना लगभग आठ घंटे सोते थे, लेकिन सुबह उठते ही ऐसा लगता था जैसे पूरी रात जागे हों।

शुरुआत में उन्होंने इसे काम के तनाव से जोड़कर देखा। लेकिन जब कई महीनों तक यही स्थिति बनी रही तो उन्होंने डॉक्टर से सलाह ली। जांच में पता चला कि उनके शरीर में विटामिन D और विटामिन B12 की कमी थी। साथ ही उनका स्क्रीन टाइम भी काफी अधिक था, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।

उपचार और जीवनशैली में बदलाव के बाद उनकी समस्या काफी हद तक कम हो गई। राकेश की तरह लाखों लोग इस समस्या से गुजर रहे हैं, लेकिन अक्सर सही कारण तक पहुंच नहीं पाते।

पूरी नींद के बाद भी थकान के प्रमुख कारण

  1. बार-बार नींद टूटना- कई लोगों को पता भी नहीं चलता कि रात में उनकी नींद कई बार बाधित हो रही है।

मोबाइल नोटिफिकेशन, आसपास का शोर, तनाव या सांस लेने में रुकावट जैसी समस्याएं नींद को प्रभावित कर सकती हैं। इससे शरीर गहरी नींद तक नहीं पहुंच पाता और सुबह थकान बनी रहती है।

  1. खराब स्लीप एनवायरनमेंटृ- नींद का वातावरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जैसे कमरे में अधिक रोशनी, शोरगुल वाला माहौल, बहुत गर्म या बहुत ठंडा तापमान और असुविधाजनक गद्दा या तकिया आदि ये सभी कारक नींद की गुणवत्ता को खराब कर सकते हैं।

  1. मानसिक तनाव और चिंता- मानसिक तनाव आज की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

यदि व्यक्ति दिनभर की चिंताओं, आर्थिक दबाव, पारिवारिक समस्याओं या कार्यस्थल के तनाव से घिरा रहता है, तो उसका मस्तिष्क रात में भी पूरी तरह शांत नहीं हो पाता।

ऐसी स्थिति में शरीर सो जाता है, लेकिन दिमाग लगातार सक्रिय बना रहता है।

  1. विटामिन और मिनरल्स की कमी- थकान के पीछे पोषण संबंधी कारण भी बहुत आम हैं। विशेष रूप से विटामिन D की कमी, विटामिन B12 की कमी, आयरन की कमी (एनीमिया) और मैग्नीशियम की कमी आदि। ये सभी शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में आयरन की कमी अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है, जिसके कारण थकान लंबे समय तक बनी रह सकती है।

  1. थायरॉइड की समस्या- थायरॉइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है।

यदि थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो जाए (Hypothyroidism), तो व्यक्ति को लगातार थकान, वजन बढ़ना, सुस्ती और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।

  1. स्लीप एप्निया- यह एक गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या है।

स्लीप एप्निया में व्यक्ति की सांस नींद के दौरान बार-बार रुकती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

ऐसे लोग अक्सर पूरी रात सोने के बावजूद सुबह थके हुए महसूस करते हैं।

  1. अनियमित दिनचर्या- देर रात तक जागना, सप्ताहांत में अलग समय पर सोना या बार-बार स्लीप शेड्यूल बदलना शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित करता है। विशेषज्ञ इसे Circadian Rhythm Disruption कहते हैं।

किन लोगों को ज्यादा होती है यह समस्या?

  • नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी।
  • लगातार स्क्रीन पर काम करने वाले लोग।
  • डायबिटीज के मरीज।
  • थायरॉइड रोगी।
  • 35 वर्ष से अधिक आयु के लोग।
  • शारीरिक गतिविधि कम करने वाले लोग।
  • तनावपूर्ण जीवनशैली जीने वाले लोग।

क्या केवल ज्यादा सोना समाधान है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा सोना हमेशा बेहतर नहीं होता। कई लोग बताते हैं कि आवश्यकता से अधिक नींद लेना भी शरीर को सुस्त बना सकता है।

इसलिए केवल नींद के घंटों पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।

ऊर्जा वापस पाने के लिए क्या करें?

नियमित स्लीप शेड्यूल अपनाएंऔर हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।

स्क्रीन टाइम कम करें

सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनाएं। ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता कम हो सकती है।

संतुलित आहार लें

  • हरी सब्जियां।
  • फल।
  • बादाम।
  • अखरोट।
  • दालें।
  • प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ।
  • नियमित व्यायाम करें।

दिन में कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि शरीर की ऊर्जा और नींद दोनों में सुधार कर सकती है।

तनाव कम कैसे करें?

ध्यान, योग, गहरी सांस लेने की तकनीक और जर्नलिंग जैसी गतिविधियां मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

  • कई सप्ताह तक लगातार थकान।
  • दिनभर नींद आना।
  • खर्राटों के साथ सांस रुकना।
  • अचानक वजन बढ़ना या घटना।
  • कमजोरी और चक्कर आना।
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर थायरॉइड, विटामिन D, B12, आयरन और अन्य आवश्यक जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

ये भी पढ़ें- Social Media Detox: सोशल मीडिया से थक गए हैं? ये 10 किताबें बदल सकती है आपकी सोच

पूरी नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस करना सामान्य स्थिति नहीं है। यह शरीर का संकेत हो सकता है कि कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ रहा है। इसके पीछे खराब नींद की गुणवत्ता, मानसिक तनाव, पोषण की कमी, हार्मोनल असंतुलन या कोई चिकित्सीय समस्या हो सकती है।

अच्छी बात यह है कि अधिकांश मामलों में जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त आराम से स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

यदि थकान लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होगा। आखिर स्वस्थ शरीर और सक्रिय मन ही बेहतर जीवन की सबसे मजबूत नींव हैं।

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