सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘The Vvaan’ का बिहार के बिहटा स्थित मां वन देवी मंदिर से खास कनेक्शन, जानें पूरी कहानी ओर क्यूँ tvf के संस्थापक और प्रमुख अरुणाभ कुमार के लिए खास है ये फिल्म
नई दिल्ली/पटना: भारतीय सिनेमा में अब कहानियां सिर्फ बड़े शहरों, महलों और काल्पनिक दुनियाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में सदियों से जीवित लोककथाएं भी अब बड़े पर्दे तक पहुंच रही हैं। ऐसी ही एक कहानी बिहार के पटना जिले के बिहटा क्षेत्र से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंची है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा की आगामी फिल्म ‘The Vvaan: Force of the Forest’ इन दिनों अपनी रहस्यमयी कहानी और भारतीय लोककथा से जुड़े विषय के कारण चर्चा में है। फिल्म का एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत बिहार का मां वन देवी मंदिर है, जहां सदियों से एक ऐसी परंपरा निभाई जा रही है जिसने फिल्म के निर्माताओं को भी प्रभावित किया।
मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यह है कि सूर्यास्त के बाद मंदिर और आसपास के जंगल में किसी व्यक्ति को रुकने की अनुमति नहीं होती। स्थानीय विश्वास के अनुसार, रात का समय मां वन देवी के लिए होता है और अंधेरा होने के बाद मंदिर परिसर को पूरी तरह खाली कर दिया जाता है।
इसी वास्तविक लोककथा को फिल्म ‘The Vvaan: Force of the Forest’ में एक बड़े फोकलोर-फैंटेसी और रहस्यपूर्ण सिनेमाई संसार के रूप में पेश किया जा रहा है।
लोककथाएं और ‘The Vvaan’ का सांस्कृतिक कनेक्शन
बिहार सिर्फ प्राचीन इतिहास और धार्मिक स्थलों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसकी पहचान लोककथाओं, लोकदेवताओं और गहरी सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है।
बिहार में आज भी कई ऐसी मान्यताएं और परंपराएं हैं जो लिखित इतिहास से अधिक लोगों की जुबान और पीढ़ियों की स्मृतियों में जीवित हैं। मां वन देवी मंदिर की कहानी भी इन्हीं जीवित लोककथाओं में से एक है।
फिल्म ‘The Vvaan’ का बिहार से जुड़ाव इसलिए भी खास बन जाता है क्योंकि यह कहानी केवल किसी मंदिर के रहस्य को नहीं दिखाती, बल्कि उस सांस्कृतिक दुनिया को छूती है जिसमें प्रकृति, जंगल, देवी-देवता और स्थानीय विश्वास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
यही तत्व बिहार के सबसे बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व छठ पूजा में भी दिखाई देते हैं।
छठ पूजा और बिहार की प्रकृति से जुड़ी आस्था
छठ पूजा बिहार की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पर्व में प्रकृति और सूर्य के प्रति आस्था को विशेष स्थान दिया जाता है। श्रद्धालु जल, सूर्य, मिट्टी और प्राकृतिक परिवेश के बीच पूजा करते हैं।
छठ का सबसे खास पहलू यह है कि इसमें आस्था का संबंध सीधे प्रकृति से दिखाई देता है। नदी, तालाब और अन्य जल स्रोत पूजा के केंद्र बनते हैं, जबकि उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
यही प्रकृति और आस्था का रिश्ता मां वन देवी मंदिर की लोककथा में भी एक अलग रूप में दिखाई देता है। यहां जंगल सिर्फ एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि देवी की शक्ति और स्थानीय विश्वास का हिस्सा है।
इस दृष्टि से देखें तो ‘The Vvaan’ की कहानी उस सांस्कृतिक सोच से भी जुड़ती दिखाई देती है, जिसमें प्रकृति को केवल संसाधन नहीं बल्कि एक शक्ति के रूप में देखा जाता है।
बिहार में छठ पूजा हो या जंगलों और स्थानीय देवी-देवताओं से जुड़ी लोकमान्यताएं—दोनों ही परंपराएं मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाती हैं।
मां वन देवी मंदिर: जहां से मिली ‘The Vvaan’ की कहानी को प्रेरणा
पटना जिले के बिहटा क्षेत्र के पास स्थित मां वन देवी मंदिर एक साधारण लेकिन बेहद खास धार्मिक स्थल है। यहां देवी की पूजा किसी पारंपरिक मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र पिंड के रूप में की जाती है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का इतिहास कई सदियों पुराना है और इसकी कहानी मां विंध्यवासिनी से जुड़ी हुई बताई जाती है।
लोककथा के अनुसार, रघोपुर क्षेत्र में रहने वाले मां विंध्यवासिनी के एक भक्त विद्यानंद मिश्रा नियमित रूप से विंध्याचल जाकर देवी की पूजा करते थे। उम्र बढ़ने के साथ यात्रा करना कठिन होने लगा।
मान्यता है कि देवी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और उनके निवास क्षेत्र में ही पूजा स्थल स्थापित करने का संकेत दिया। इसके बाद एक पवित्र पिंड को जंगल क्षेत्र में स्थापित किया गया।
क्योंकि यह स्थान घने जंगलों के बीच था, इसलिए देवी को वन देवी यानी जंगल की देवी के रूप में पहचाना जाने लगा।
सूर्यास्त के बाद क्यों खाली हो जाता है मंदिर?
मां वन देवी मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा सूर्यास्त के बाद की है। स्थानीय विश्वास के अनुसार, शाम ढलने के बाद कोई व्यक्ति मंदिर परिसर या जंगल में नहीं रुकता।
मंदिर के कपाट बंद होने के बाद पुजारी भी परिसर से चले जाते हैं।
लोकमान्यता है कि रात के समय मां वन देवी मंदिर और जंगल के आसपास विचरण करती हैं। इस कारण अंधेरा होने के बाद परिसर को खाली छोड़ दिया जाता है।
यही विचार ‘The Vvaan’ की कहानी के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक बना।
फिल्म में भी एक निषिद्ध जंगल और उससे जुड़े नियम कहानी को आगे बढ़ाते हैं। वहां आधुनिक सोच और सदियों पुराने विश्वास के बीच टकराव देखने को मिलता है।
क्या मिला अरुणाभ कुमार को इस मंदिर में ?
‘The Vvaan’ के लेखक अरुणाभ कुमार के लिए मां वन देवी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थान नहीं था, बल्कि एक ऐसी लोककथा का केंद्र था जिसमें सिनेमा की अपार संभावनाएं थीं।
मंदिर का दौरा करने और स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत के छोटे शहरों और गांवों में ऐसी अनेक कहानियां मौजूद हैं, जिन्हें अभी तक बड़े पर्दे पर पर्याप्त जगह नहीं मिली है।
अरुणाभ कुमार के विचारों का सार यही है कि भारत की लोककथाओं में असाधारण कहानियों का विशाल संसार मौजूद है और मां वन देवी की कथा ने उन्हें आस्था, जंगल और इंसानी जिज्ञासा के बीच एक शक्तिशाली सिनेमाई संघर्ष दिखाई दिया।
उनके अनुसार, स्थानीय लोगों की बातों और मंदिर से जुड़ी सूर्यास्त के बाद की परंपरा ने इस कहानी के रहस्य और भावनात्मक पक्ष को और गहरा बनाया।
यहीं से ‘The Vvaan’ जैसी कहानी का विचार विकसित हुआ।
‘The Vvaan’ में क्या है बिहार की लोककथा का असर?
‘The Vvaan: Force of the Forest’ एक फोकलोर-फैंटेसी और रहस्य से भरी कहानी है। फिल्म में एक ऐसा जंगल है जिसके बारे में गांव के लोगों के अपने नियम और मान्यताएं हैं।
लेकिन जब आधुनिक सोच रखने वाला एक व्यक्ति इन नियमों को चुनौती देता है, तो उसके सामने ऐसी घटनाएं सामने आने लगती हैं जिन्हें वह अपनी तर्कसंगत सोच से समझ नहीं पाता।
यही वह बिंदु है जहां फिल्म की कहानी और मां वन देवी मंदिर की वास्तविक लोककथा एक-दूसरे से जुड़ती हैं।
फिल्म किसी मंदिर की डॉक्यूमेंट्री नहीं है और इसकी कहानी सिनेमाई कल्पना के साथ आगे बढ़ती है। लेकिन निषिद्ध जंगल, सूर्यास्त के बाद प्रवेश से जुड़ा डर और प्रकृति के भीतर मौजूद एक अदृश्य शक्ति की भावना बिहार की लोकमान्यताओं से प्रेरित बताई जाती है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म में कौन-कौन आएंगे नजर?
‘The Vvaan: Force of the Forest’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं।
फिल्म से जुड़े कलाकारों में सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, अनुप सोनी और श्वेता तिवारी जैसे नाम भी शामिल हैं।
फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा कर रहे हैं, जिन्हें ‘Panchayat’ जैसी लोकप्रिय सीरीज के लिए जाना जाता है। कहानी और इसके लोककथा आधारित विचार के पीछे अरुणाभ कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह फिल्म भारतीय लोककथाओं को आधुनिक सिनेमा की भाषा में पेश करने की कोशिश करती है।
छठ, जंगल और देवी: बिहार की संस्कृति का एक साझा भाव
‘The Vvaan’ को समझने के लिए बिहार की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को देखना भी दिलचस्प है।
छठ पूजा में जहां सूर्य और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है, वहीं मां वन देवी जैसी स्थानीय देवी से जुड़ी मान्यताओं में जंगल और प्राकृतिक स्थानों को शक्ति और आस्था के रूप में देखा जाता है।
दोनों परंपराओं का स्वरूप अलग है, लेकिन एक बात समान है—प्रकृति के प्रति सम्मान और मनुष्य से बड़ी किसी शक्ति के प्रति विश्वास।
यही सांस्कृतिक भाव फिल्म की कहानी को सिर्फ एक हॉरर या फैंटेसी फिल्म से अलग बनाता है। ‘The Vvaan’ के पीछे मौजूद प्रेरणा भारतीय लोकविश्वासों और ग्रामीण जीवन की उन कहानियों से आती है जो आज भी कई क्षेत्रों में जीवित हैं।
मां वन देवी मंदिर कैसे पहुंचें?
मां वन देवी मंदिर पटना से लगभग 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर बिहटा क्षेत्र के पास स्थित है।
रेल से आने वाले यात्रियों के लिए बिहटा रेलवे स्टेशन नजदीकी प्रमुख स्टेशन है। वहां से स्थानीय परिवहन के जरिए मंदिर क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है।
पटना एयरपोर्ट से भी सड़क मार्ग के जरिए बिहटा क्षेत्र पहुंचा जा सकता है।
मंदिर जाने वाले लोगों को स्थानीय परंपराओं का सम्मान करना चाहिए, विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद परिसर में न रुकने से जुड़े नियम का।
जब बिहार की लोककथा पहुंची बॉलीवुड के बड़े पर्दे तक
सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘The Vvaan: Force of the Forest’ ने एक ऐसी कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है जो लंबे समय से बिहार के स्थानीय लोगों की आस्था और लोकस्मृति का हिस्सा रही है।
मां वन देवी मंदिर का पवित्र पिंड, जंगल से जुड़ी पहचान और सूर्यास्त के बाद मंदिर को खाली करने की परंपरा इस जगह को बेहद अलग बनाती है।
फिल्म इस लोककथा को अपने काल्पनिक और सिनेमाई रूप में पेश करती है, लेकिन इसकी जड़ें बिहार की उस सांस्कृतिक दुनिया में दिखाई देती हैं जहां आस्था और प्रकृति का रिश्ता बेहद गहरा है।
छठ पूजा में सूर्य और प्रकृति के प्रति श्रद्धा हो या जंगल की देवी मां वन देवी के प्रति स्थानीय विश्वास—बिहार की संस्कृति में प्रकृति सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
‘The Vvaan’ इसी सांस्कृतिक और रहस्यमयी दुनिया को बड़े पर्दे पर एक नए अंदाज में पेश करने की तैयारी कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहटा की एक स्थानीय लोककथा से प्रेरित यह कहानी दर्शकों के बीच किस तरह अपनी जगह बनाती है।