नई दिल्ली: दुनिया की सबसे मशहूर लैंडमार्क्स में शामिल फ्रांस का Eiffel Tower सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि एक दिलचस्प वैज्ञानिक तथ्य की वजह से भी चर्चा में रहता है।
बहुत कम लोग जानते है कि गर्मियों के मौसम में एफिल टावर की ऊंचाई कुछ सेंटीमीटर तक बढ़ जाती है। यह सुनने में काफी अजीब लगेगा, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह वैज्ञानिक कारण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान बढ़ने पर Effiel Tower में इस्तेमाल किया गया लोहा फैलता है, जिससे इसकी ऊंचाई लगभग 12 से 15 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती है। तपमान कम होने पर यह फिर अपनी सामान्य स्थिती में लौट आत है।
क्या है इसके पीछे की वजह?
भौतिकी में इस प्रक्रिया को थर्मल एक्सपैंशन (Thermal Expansion) कहा जाता है। जब किसी धातु को गर्मी मिलती है तो उसके भीतर मौजूद कण तेजी से गति करने लगते हैं। इससे उनके बीच की दूरी बढ़ जाती है और धातु का आकार थोड़ा फैल जाता है।
ठंडे मौसम में यही कण धीमे हो जाते हैं, जिससे धातु सिकुड़ने लगती है। यही कारण है कि एफिल टावर की ऊंचाई मौसम के अनुसार बदलती रहती है।

लौहे से बना है पूरा ढ़ाचा
साल 1889 में तैयार किया गया Eiffel Tower हजारों लोहे के हिस्सों को जोड़कर बनाया गया था। इसकी मूल ऊंचाई करीब 300 मीटर है, जबकि एंटीना सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 324 मीटर मानी जाती है।
गर्मियों में तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण इसके लोहे के हिस्सों में हल्का विस्तार होता है। इसी वजह से टावर कुछ सेंटीमीटर ऊंचा दिखाई देता है। कई बार असमान गर्मी के कारण टावर में हल्का झुकाव भी देखा जा सकता है।
सिर्फ एफिल टावर ही नहीं, दूसरी संरचनाएं भी होता है प्रभावित
थर्मल एक्सपेंशन सिर्फ Eiffel Tower तक सीमित नहीं है। ये हर जगह होता है-
- ब्रिज: लंबे ब्रिज में एक्सपेंशन जॉइंट लगाए जाते हैं, जो फैलने-सिकुड़ने की जगह देते हैं। बिना इनके ब्रिज टूट सकता है।
- रेलवे ट्रैक: गर्मी में रेल की पटरी फैलती है, इसलिए कभी-कभी “सन किंक” हो जाता है।
- कंक्रीट की इमारतें: कंक्रीट भी थोड़ा फैलता है, लेकिन लोहे जितना नहीं। आधुनिक इमारतों में खास मटेरियल और डिजाइन इस्तेमाल किए जाते हैं।
- घरेलू चीजें: गर्म चाय की केतली का ढक्कन कस जाता है, क्योंकि धातु फैलती है।
रोचक फैक्ट: Eiffel Tower का लोहा coefficient of thermal expansion लगभग 12 × 10⁻⁶ per °C है। यानी 1 मीटर लोहा 1 डिग्री तापमान बढ़ने पर 0.012 मिलीमीटर फैलता है। इतनी बड़ी टावर में ये आंकड़ा काफ़ी प्रभावशाली हो जाता है।

रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाता है असर
थर्मल एक्सपैंशन के उदाहरण हमारे आसपास भी आसानी से देखे जा सकते हैं। गर्मियों में बिजली के तार थोड़े ढीले दिखाई देते हैं, रेलवे पटरियों के बीच जगह छोड़ी जाती है और धातु के जार का ढक्कन गर्म पानी डालने पर आसानी से खुल जाता है।
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इंजीनियरिंग की शानदार उदाहरण
एफिल टावर को डिजाइन करने वाले इंजीनियर गुस्ताव एफिल ने निर्माण के समय ही तापमान के प्रभाव को ध्यान में रखा था। यही वजह है कि 130 साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यह संरचना सुरक्षित और मजबूत बनी हुई है।
एफिल टावर सिर्फ फ्रांस की पहचान ही नहीं, बल्कि विज्ञान और इंजीनियरिंग का शानदार नमूना भी है। मौसम के साथ इसकी ऊंचाई का बढ़ना और घटना यह दिखाता है कि प्रकृति के नियम दुनिया की सबसे बड़ी संरचनाओं को भी प्रभावित करते हैं।
अगली बार जब आप Effiel Tower की तस्वीर देखें, तो याद रखिए कि यह मौसम के साथ थोड़ा-सा “बढ़ता” और “घटता” भी है।