Bihar Politics: क्या मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को नहीं पसंद आया "सम्राट मॉडल", एक स्वर में कहा – बिहार में चलेगा सिर्फ "नीतीश मॉडल"

Bihar Politics: क्या मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को नहीं पसंद आया “सम्राट मॉडल”, एक स्वर में कहा – बिहार में चलेगा सिर्फ “नीतीश मॉडल”

Bihar Politics: बिहार की सियासत में ‘सम्राट मॉडल’ vs ‘नीतीश मॉडल’ का विवाद तेज, लेकिन JDU, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कर दिया – राज्य में सिर्फ नीतीश कुमार का सुशासन मॉडल ही चलेगा। NDA में एकजुटता दिखी, जानिए पूरी कहानी।

पटना: बिहार की राजनीति में कभी-कभी एक छोटा-सा सोशल मीडिया पोस्ट भी बड़ा तूफान खड़ा कर देता है। ऐसा ही कुछ हुआ जब बीजेपी के एक प्रवक्ता ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपराध पर सख्त कार्रवाई को ‘सम्राट मॉडल’ कहकर सराहा और इसे योगी मॉडल से जोड़ा।

पोस्ट जल्दी ही हटा लिया गया, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा था। जल्द ही NDA के सहयोगी दलों ने एकजुट होकर जवाब दिया – बिहार में कोई नया या अलग मॉडल नहीं चलेगा, यहां तो 2005 से सिर्फ और सिर्फ ‘नीतीश मॉडल’ ही चल रहा है और आगे भी यही चलेगा।

कैसे हुई विवाद की शुरुआत ?

सब कुछ शुरू हुआ बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार के एक एक्स पोस्ट से। उन्होंने सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हो रही एनकाउंटर, बुलडोजर कार्रवाई और अपराधियों के सरेंडर को ‘सम्राट मॉडल’ बताया और दावा किया कि तीन महीने में बिहार अपराध-मुक्त हो जाएगा। पोस्ट में इसे ‘योगी मॉडल’ जैसा कहा गया। लेकिन कुछ ही घंटों में पोस्ट डिलीट कर दिया गया और एक वीडियो जारी करके स्पष्ट किया गया कि असल क्रेडिट नीतीश कुमार के ‘सुशासन मॉडल’ को जाता है, जिसकी तारीफ पूरे देश में होती है। सम्राट चौधरी सिर्फ इसे लागू कर रहे हैं।

फिर भी, इस छोटे से विवाद ने NDA के अंदर एक बड़ा संदेश दे दिया। खासकर तब जब नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं और अगले मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।

JDU ने सबसे पहले ठुकराया

जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने सबसे पहले इस ‘सम्राट मॉडल’ को खारिज किया। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और JDU MLC नीरज कुमार ने साफ कहा – “2005 से बिहार नीतीश मॉडल पर चल रहा है। दुनिया भर में इसकी तारीफ होती है। कोई मंत्री अपना अलग मॉडल नहीं चला सकता। सम्राट जी भी नीतीश मॉडल के तहत ही काम कर रहे हैं।”

मांझी का सख्त संदेश

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने और सख्त लहजे में कहा – “नीतीश के बाद जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे नीतीश के पदचिह्नों पर ही चलना होगा। अगर नहीं चला तो कुर्सी पर टिक नहीं पाएगा।” मांझी का यह बयान सीधे-सीधे किसी भी नए दावेदार को चेतावनी था।
उपेंद्र कुशवाहा ने भी दिया एकमत बयान

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा – “बिहार में दूसरे राज्य का मॉडल नहीं चलेगा। बिहार का मॉडल यानी नीतीश मॉडल में कोई परेशानी नहीं है। यह शासन का मॉडल सर्वस्वीकार्य है। NDA की अगली सरकार भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाएगी।” उन्होंने अगले मुख्यमंत्री के नाम पर कहा कि यह फैसला BJP और NDA की केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

नीतीश कुमार की राज्यसभा यात्रा और समृद्धि यात्रा के दौरान सम्राट चौधरी के साथ उनके बार-बार दिखने से उत्तराधिकार की अटकलें तेज हो गई थीं। सम्राट चौधरी का नाम अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे आगे चल रहा है। ऐसे में ‘सम्राट मॉडल’ का जिक्र नीतीश के 20 साल पुराने ब्रांड ‘सुशासन’ को कमजोर करने जैसा लग रहा था।

NDA के सहयोगी दलों ने एक साथ आकर इस बात को साफ कर दिया कि नीतीश का फॉर्मूला ही राज्य की राजनीति का आधार रहेगा। यह घटना दिखाती है कि बिहार की गठबंधन राजनीति में वरिष्ठ साथी की विरासत कितनी मजबूती से संरक्षित की जाती है, खासकर 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले।

अंत में क्या निकला?

सम्राट चौधरी ने इस पूरे विवाद पर चुप्पी साध रखी है और अपने काम में लगे हुए हैं। बीजेपी नेतृत्व ने भी इसे बढ़ावा नहीं दिया। अब साफ है – बिहार में ‘मॉडल’ सिर्फ एक ही है, और वह है ‘नीतीश मॉडल’। बाकी सब शोर-शराबा।

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