तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले का डॉ. K. A. Paul ने किया स्वागत, 9 अन्य MLAs पर भी कार्रवाई की मांग

तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले का डॉ. K. A. Paul ने किया स्वागत, 9 अन्य MLAs पर भी कार्रवाई की मांग

दानम नागेंद्र की अयोग्यता के बाद BRS से कांग्रेस में गए विधायकों के मामलों की जांच का मुद्दा उठाया

हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दानम नागेंद्र को विधायक पद से अयोग्य ठहराए जाने के बाद प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. के. ए. पॉल ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने BRS से कांग्रेस में गए नौ अन्य विधायकों के मामलों की भी कानूनी जांच की मांग की है।

हाई कोर्ट ने शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष के पूर्व आदेश को रद्द कर दिया और दानम नागेंद्र को 23 अप्रैल 2024 से अयोग्य घोषित किया। नागेंद्र ने 2023 में BRS के टिकट पर खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने कांग्रेस का रुख किया और 2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

अदालत ने खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करते हुए अपने आदेश की जानकारी विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग को देने का निर्देश दिया।

डॉ. पॉल ने फैसले को बताया संवैधानिक मुद्दा

डॉ. पॉल ने कहा कि अदालत के फैसले का संबंध केवल एक विधायक से नहीं है। उन्होंने इसे चुनावी जनादेश और निर्वाचित प्रतिनिधियों की संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा विषय बताया।

उन्होंने कहा, “मैं तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। जनता के जनादेश का सम्मान करना और निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को कानून के अनुसार लागू करना जरूरी है।”

10 BRS विधायकों को लेकर PIL का उल्लेख

डॉ. पॉल ने बताया कि उन्होंने 2024 में तेलंगाना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कांग्रेस में गए 10 BRS विधायकों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की मांग की गई थी।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार स्वयं अदालत में इस मामले की पैरवी की और दानम नागेंद्र भी याचिका में शामिल थे।

अब उन्होंने बाकी नौ विधायकों के मामलों की भी अलग-अलग जांच करने की मांग की है।

“समान परिस्थितियों वाले अन्य विधायकों के मामलों को भी सक्षम अधिकारियों को देखना चाहिए। उन्हें संविधान और लागू कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दिया जोर

डॉ. पॉल ने कहा कि ऐसे मामलों का संबंध संवैधानिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से भी है।

उन्होंने 1975 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले और 2007 में BSP विधायकों से जुड़े दल-बदल मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर मामले की जांच उसके अपने तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “राजनीतिक दल और सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन संविधान बना रहता है। चुनावी जनादेश जनता का होता है।”

हाई कोर्ट के आदेश के बाद खैरताबाद विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। आगे की प्रक्रिया संबंधित संवैधानिक और निर्वाचन प्राधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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