दिल्ली हाई कोर्ट ने 28 मई 2025 को स्वराज एक्सप्रेस के भिंड ब्यूरो प्रमुख अमरकांत सिंह चौहान को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया। इस फैसले के बाद वरिष्ठ पत्रकार राकेश कुमार ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ( PCI ) द्वारा मध्य प्रदेश में डर और दबाव का सामना कर रहे रिपोर्टरों के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाने की खुलकर सराहना की।
डर और उत्पीड़न: पत्रकारिता पर हमला
तीन दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय राकेश कुमार का कहना है कि जो पत्रकार वास्तव में कठिन राजनीतिक-सामाजिक सत्य उजागर करते हैं, उन्हें लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा,
“मध्य प्रदेश में जो घटनाएं हो रही हैं, वे बहुत ही गंभीर हैं। पत्रकारों को बुलाकर पीटने, कपड़े उतरवाकर अपमानित करने और झूठे मुकदमे में फंसाने जैसी घटनाएं कानून के उल्लंघन के साथ-साथ सत्ता के दुरुपयोग को भी दर्शाती हैं।”
इस संदर्भ में पीसीआई ने न केवल मामलों को उजागर कर मनोबल बढ़ाया, बल्कि क्षतिग्रस्त पत्रकारों को त्वरित कानूनी मदद और सुरक्षा दिलाने के लिए भी दबाव बनाया। राकेश कुमार के अनुसार, “प्रेस क्लब की तत्परता ने स्पष्ट कर दिया कि पत्रकारिता समुदाय अन्याय के सामने शांत नहीं रह सकता।”
मध्य प्रदेश के प्रमुख मामले
- अमरकांत सिंह चौहान: अवैध रेत खनन एवं पुलिस के कथित साजिश की रिपोर्टिंग के चलते उन्हें जान का खतरा बताया। लगातार धमकियों के बाद चौहान ने मध्य प्रदेश छोड़ दिया और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- धर्मेंद्र ओझा (न्यूज़ 24), शशिकांत गोयल (बेजोड़ रत्न), प्रीतम सिंह (एनटीवी भारत): इन सभी ने भी धमकियों, शारीरिक हमलों और जबरन बयान वापसी कराने की कोशिशों का सामना किया।
इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते हमलों के पीछे न केवल गैरकानूनी तत्वों की भूमिका है, बल्कि कभी-कभी राजनीतिक संरक्षण भी होता है।
पत्रकार सुरक्षा के लिए करवाई की मांग
राकेश कुमार ने सभी मीडिया संगठनों, नागरिक समाज और संवैधानिक संस्थानों से अपील की कि वे मिलकर इंटर्नल प्रेस सुरक्षा कानून की दिशा में दबाव बनाएं। उनके प्रमुख वाक्य थे:
“यह मामला सिर्फ किसी एक पत्रकार या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा हुआ है। हमें एकजुट होकर जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य में पत्रकार सुरक्षा के लिए समर्पित हेल्पलाइन और आपातकालीन प्रोटोकॉल स्थापित हों, ताकि उत्पीड़न के शिकार कोई भी रिपोर्टर सहजता से मदद पा सके।
आगे की राह
राकेश कुमार ने कहा कि मीडिया इकाइयों को सतर्क रहना होगा और सभी अत्याचारों को लगातार रेखांकित करना होगा, ताकि दबाव में काम करने वाले पत्रकारों की आवाज़ दबे नहीं। उन्होंने:
- सरकार से आग्रह किया कि वे पत्रकारों पर होने वाले हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत सज़ा दें।
- नागरिकों से निवेदन किया कि वे उत्पीड़न के मामलों को सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफॉर्म पर हवा दें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पर ध्यान दें।
- पीसीआई से अपील की कि वह जमीनी स्तर पर सुरक्षा उपायों के साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करे, जिससे पत्रकार भयमुक्त हो कर रिपोर्टिंग कर सकें।
राकेश कुमार ने अंततः इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रेस की एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी ढाल है। यदि हम चुप्पी साध लेंगे तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा। इसीलिए अब समय आ गया है कि सभी पत्रकार, मीडिया संस्थान और समाज मिलकर आवाज़ बुलंद करें और यही करेंगे तो पत्रकार स्वतंत्रता बचाई जा सकती है।
(समाप्त)