गुरुग्राम में प्रदर्शन कर ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के परिवारों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और मरीजों के अनुभवों पर विचार करने की अपील की
गुरुग्राम: स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रभावित बच्चों के परिवारों ने अपनी चिंताओं को सामने रखने की मांग की है। रविवार को पेरेंट्स फोरम फॉर स्टेम सेल्स इन ऑटिज्म एंड सेरेब्रल पाल्सी ने गुरुग्राम के सुभाष चंद्र बोस पार्क में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया। इस दौरान संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारियों को संबोधित खुला पत्र जारी किया।
फोरम ने अपने पत्र में फैसले से प्रभावित परिवारों को सुनवाई का उचित अवसर देने की अपील की। संगठन चाहता है कि बच्चों की चिकित्सा जरूरतों, अभिभावकों के अनुभवों, वैज्ञानिक शोध और संबंधित डॉक्टरों के विचारों को निष्पक्ष रूप से देखा जाए। फोरम के मुताबिक, वह करीब 5,000 परिवारों का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रदर्शन का केंद्र यश चैरिटेबल ट्रस्ट एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य, रिट याचिका (सिविल) 369/2022 मामले में स्टेम सेल थेरेपी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का फैसला रहा। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावित परिवारों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला या नहीं।
डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने प्रदर्शन के दौरान अपने बच्चे से जुड़ा अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें स्टेम सेल थेरेपी के बाद अपने बच्चे में सुधार दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि उनके जैसे परिवारों के अनुभवों को सुना जाना चाहिए और उनका निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए।
कार्यक्रम में बच्चों के माता-पिता के अलावा दादा-दादी और अन्य रिश्तेदार भी शामिल हुए। उन्होंने उन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई, जो पहले से उपचार प्राप्त कर रहे हैं या स्टेम सेल थेरेपी करा चुके हैं। प्रदर्शन में शामिल सोनिया ने परिवारों की सामूहिक चिंता और अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
फोरम ने अपने खुले पत्र में वैज्ञानिक शोधपत्रों और मरीजों के अनुभवों की समीक्षा की मांग की। संगठन ने भारतीय डॉक्टरों और अस्पतालों द्वारा किए गए कार्यों पर भी उचित विचार करने की अपील की। उसने कहा कि चिकित्सा से जुड़े निर्णयों में वैज्ञानिक साक्ष्यों और मरीजों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
अभिभावकों ने नैदानिक परीक्षण करने वाले संस्थानों में उपचार प्राप्त कर रहे बच्चों को स्थानांतरित करने से जुड़े निर्देश पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, ऐसे निर्णयों में उपयुक्त संस्थानों की उपलब्धता, उपचार की निरंतरता और प्रत्येक बच्चे की आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदर्शन में स्टेम सेल आधारित उत्पादों और मरीज की अपनी कोशिकाओं से जुड़ी उपचार प्रक्रियाओं के बीच अंतर पर भी चर्चा हुई। फोरम ने संबंधित अधिकारियों से नियामकीय व्यवस्था पर विचार करते समय मरीजों, परिवारों और डॉक्टरों के दृष्टिकोण को शामिल करने की मांग की।
आयोजकों ने बताया कि दिल्ली में सार्वजनिक सभाओं पर कथित प्रतिबंधों को देखते हुए उन्होंने गुरुग्राम में प्रदर्शन का आयोजन किया। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की आवाज संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना है।
फोरम ने अंत में बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और अनुच्छेद 21 के तहत उनके हितों पर विचार करने की अपील की। संगठन ने कहा कि स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े कानूनी और चिकित्सकीय मुद्दों पर फैसला लेते समय प्रभावित बच्चों की जरूरतों तथा परिवारों की चिंताओं को भी सुनना चाहिए।