कक्षा 6 से लागू होगा R1, R2, R3 फॉर्मूला, 9–10 में तीनों में पास होना जरूरी
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत एक नई भाषा नीति लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसका उद्देश्य छात्रों को बहुभाषी बनाना और उनकी भाषा क्षमता को मजबूत करना है। इस नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिन्हें R1, R2 और R3 के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
R1 में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा शामिल होगी, R2 में हिंदी या अंग्रेज़ी और R3 में कोई अन्य भारतीय या विदेशी भाषा होगी। इस नीति के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय हों, जिससे देश की भाषाई विविधता को बढ़ावा मिले।
इस नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया जाएगा, जबकि पहले केवल दो भाषाएं पढ़ाई जाती थीं। यह नियम 2026–27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगा और इसका उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही विभिन्न भाषाओं का ज्ञान देना है।
इसके साथ ही एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि कक्षा 9 और 10 में छात्रों को तीनों भाषाओं में पास होना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र किसी एक भाषा में फेल होता है, तो उसका प्रभाव उसके पूरे परिणाम पर पड़ सकता है। भविष्य में छात्रों को कक्षा 10 में तीसरी भाषा का परीक्षा भी देनी पड़ सकती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सभी भाषाओं को समान महत्व दिया जाएगा।
इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना, भारतीय भाषाओं और संस्कृति को मजबूत करना, तथा छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता को विकसित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई भाषाओं का ज्ञान छात्रों के मानसिक विकास और संचार कौशल को बेहतर बनाता है।
इस बदलाव के चलते स्कूलों को नए सिलेबस और किताबों को अपनाना होगा, जबकि छात्रों को तीनों भाषाओं पर समान ध्यान देना पड़ेगा। कुल मिलाकर, CBSE का यह नया लैंग्वेज रूल शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो छात्रों को न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाएगा, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध करेगा।