1995 के पुराने कानून की संपत्तियाँ डिनोटिफाइ नहीं होंगी, वक्फ बोर्ड पर नियुक्तियों पर भी रोक
नई दिल्ली, वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दूसरे दिन सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वर्तमान में न तो वक्फ बोर्ड और काउंसिल में कोई नई नियुक्ति की जाएगी और न ही 1995 के वक्फ कानून के तहत पंजीकृत संपत्तियों को डिनोटिफाइ किया जाएगा। कोर्ट ने इस आश्वासन को अपने आदेश में रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया है।
सरकार को 7 दिन में दाखिल करना होगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह फिलहाल किसी भी कार्यवाही पर रोक नहीं लगा रही है, लेकिन केंद्र सरकार को 7 दिन के भीतर इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फिलहाल केवल 5 महत्वपूर्ण रिट याचिकाओं पर ही विचार करेगा, जबकि बाकी 100 से अधिक याचिकाओं को निपटाया हुआ माना जाएगा।
क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम 2025?
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन्हें लेकर व्यापक विरोध हो रहा है। इनमें प्रमुख है –
- वक्फ संपत्तियों को डिनोटिफाइ करने की प्रक्रिया का सरलीकरण
- सरकार को वक्फ बोर्ड की संरचना में अधिक नियंत्रण देने का प्रस्ताव
- वक्फ प्रॉपर्टी की रिपोर्टिंग और पुनः सर्वेक्षण की शक्तियों का विस्तार
इस संशोधन को लेकर 73 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में कांग्रेस, जेडीयू, आप, डीएमके, सीपीआई जैसे राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई एनजीओ शामिल हैं। सभी ने इस संशोधन को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के खिलाफ बताया है।
फिलहाल राहत, पर आगे कड़ा परीक्षण
सरकार द्वारा फिलहाल वक्फ बोर्ड में नई नियुक्ति और संपत्तियों के डिनोटिफिकेशन पर रोक की बात ने याचिकाकर्ताओं को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन मामला अभी लंबा चलने की संभावना है। कोर्ट की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि वक्फ अधिनियम 2025 संविधान की कसौटी पर कितना खरा उतरता है।
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