₹3,000 से अधिक की UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने की खबरों को वित्त मंत्रालय ने बताया भ्रामक और बेबुनियाद

₹3,000 से अधिक की UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने की खबरों को वित्त मंत्रालय ने बताया भ्रामक और बेबुनियाद

वित्त मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ₹3,000 से अधिक की UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया कि ये खबरें “पूरी तरह से झूठी, निराधार और भ्रामक” हैं।

वित्त मंत्रालय ने ऐसी अफवाहों को “सनसनीखेज और तथ्यहीन” बताया और कहा कि इस प्रकार की भ्रामक जानकारी आम जनता में अनावश्यक चिंता और अविश्वास को जन्म देती है। मंत्रालय ने एक बार फिर सरकार की डिजिटल भुगतान प्रणाली विशेषकर UPI के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया।

मीडिया रिपोर्टों के बाद उठे सवाल

यह स्पष्टीकरण तब आया जब कई मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट दी थी कि सरकार ₹3,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार एक नए मॉडल पर विचार कर रही थी, जिसमें मर्चेंट के कुल टर्नओवर की बजाय हर एक लेनदेन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव था, जिससे बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को आर्थिक सहायता मिल सके।

वित्तीय संस्थानों ने की थी नीति पुनर्विचार की मांग

यह अटकलें उस समय और तेज़ हुईं जब पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने इस वर्ष की शुरुआत में सरकार से Zero MDR नीति की समीक्षा करने की मांग की थी। PCI, जो 180 से अधिक नॉन-बैंकिंग भुगतान संस्थानों का प्रतिनिधित्व करता है, ने जनवरी में सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि सरकार द्वारा दिया गया ₹1,500 करोड़ का प्रोत्साहन UPI प्रणाली के संचालन और विस्तार के लिए आवश्यक ₹10,000 करोड़ वार्षिक लागत के मुकाबले अपर्याप्त है।

PCI ने बड़े व्यापारियों के लिए UPI लेनदेन पर 0.3% का नाममात्र MDR शुल्क और इसी प्रकार RuPay डेबिट कार्ड भुगतानों पर भी शुल्क लगाने का सुझाव दिया था।

UPI का बढ़ता वर्चस्व

बावजूद इसके, UPI का विस्तार तेज़ी से जारी है। जनवरी 2025 में ही UPI के माध्यम से 16.99 अरब लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू ₹23.48 लाख करोड़ रही, जो अब तक का मासिक रिकॉर्ड है।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान खुदरा डिजिटल भुगतानों में से लगभग 80% UPI के माध्यम से हुए, जिसमें कुल 131 अरब ट्रांजेक्शन में ₹200 लाख करोड़ से अधिक की राशि का लेनदेन हुआ।

मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण आम जनता की आशंकाओं को दूर करने और यह भरोसा दिलाने के उद्देश्य से आया है कि UPI के माध्यम से किए गए डिजिटल भुगतान पहले की तरह ही बिना किसी MDR शुल्क के जारी रहेंगे।

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