सिर्फ एक दिन चला ‘स्मार्ट सिटी’का घंटाघर, सोशल मीडिया पर बना मज़ाक का पात्र
बिहार के बिहारशरीफ में स्मार्ट सिटी योजना के तहत 40 लाख रुपये की लागत से बना एक घंटाघर उद्घाटन के ठीक अगले दिन खराब हो गया जिससे यह सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचना का केंद्र बन गया है।
उद्घाटन की जल्दबाज़ी, और अगली सुबह चोरी
यह घंटाघर मुख्यमंत्री की ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान जल्दबाज़ी में चालू किया गया था। लेकिन उद्घाटन के अगले ही दिन चोरों ने इसमें लगे तांबे के तार चुरा लिए, जिससे यह टावर काम करना बंद कर गया।
सिर्फ 24 घंटे में बंद, और रंग-रूप पर भी सवाल
जहाँ एक ओर इसकी तकनीकी विफलता चर्चा का विषय बनी, वहीं इसके रंग-रूप और निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ यूज़र्स ने इसके “बनावटी और उबाऊ डिज़ाइन” का मज़ाक उड़ाया, जबकि कई लोगों ने “खराब पेंटिंग और घटिया फिनिशिंग” के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाए।
सोशल मीडिया पर उड़ रही खिल्ली
एक यूज़र ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “बिहार शरीफ में बना ये सीमेंट का अधपका घंटाघर, जिसकी पेंटिंग और फिनिशिंग शर्मनाक है, उद्घाटन के 24 घंटे में ही बंद हो गया। कीमत? बस 40 लाख रुपये! वाह!”
बिहार शरीफ का यह घंटाघर अब सोशल मीडिया पर व्यंग्य और आलोचना का निशाना बन गया है। जहां लोग इसके रंग-रूप को आंखों की ‘कचरा’ कह रहे हैं, वहीं एक दिन में ही बंद हो जाने को लेकर भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्मार्ट सिटी या स्मार्ट मज़ाक?
इस घटना ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की गंभीरता और कार्यान्वयन पर सवालिया निशान लगा दिया है। जनता अब जानना चाहती है कि 40 लाख की लागत से बने इस ‘घंटाघर’ में वास्तव में समय देखने लायक कुछ भी था या नहीं।
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