कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद कड़क रुख वाले भारत–पाक दाँवपेच के बीच पाक सरकार ने आर्थिक तंगी झेलते हुए भी अपने मंत्रियों को ऐशो-आराम के भत्तों से नवाजा
कश्मीर के पहलगाम में हाल के आतंकवादी हमले ने भारत–पाक संबंधों को एक नए गतिरोध में धकेल दिया है। भारत ने अपनी ओर से आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि पाकिस्तान का नेतृत्व घरेलू आर्थिक संकट के बावजूद नौकरशाही सैलाब में भत्तों की बरसात कर रहा है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल में पारित “केंद्रीय मंत्री एवं राज्य मंत्री (वेतन, भत्ते व विशेषाधिकार) संशोधन अध्यादेश, 2025” पर हस्ताक्षर किए। इस अध्यादेश ने केंद्रीय व राज्य मंत्रियों के मासिक वेतन में 188% तक की वृद्धि कर दी है। पाकिस्तान के प्रमुख समाचार चैनल जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अब मंत्रियों का माहवार वेतन 5,19,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुँच गया है, जो पहले क्रमशः 2,00,000 रुपये (केंद्रीय मंत्री) व 1,80,000 रुपये (राज्य मंत्री) था।
पैरोनामा की पृष्ठभूमि
– वर्ष 2025 की शुरुआत में ही संसद ने सांसदों के वेतन में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी।
– 21 मार्च को मंत्रिपरिषद् ने अध्यादेश जारी किया, जिसका अंतिम स्वरूप राष्ट्रपति की मुहर के साथ लागू हुआ।
– इसी से पहले फरवरी में पारित ‘सांसद वेतन एवं भत्ता संशोधन विधेयक 2025’ ने सांसदों के वेतन को 2,18,000 रुपये से बढ़ाकर 5,19,000 रुपये कर दिया था।
विधायी स्वीकृति और राजनीतिक एकरूपता
यह बिल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की सांसद रोमिना खुर्शीद आलम ने पेश किया था, जिस पर सभी राजनीतिक दलों ने निर्विरोध सहमति जता दी। 26 जनवरी को नेशनल असेंबली की वित्त समिति ने अयाज सादिक की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव को बिना किसी आपत्ति के पारित कर दिया था।
विवादास्पद वृद्धि पर सवाल
जब पाकिस्तान गहरी आर्थिक मंदी व बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है, ऐसे में मंत्रियों व सांसदों की उल्लेखनीय वेतनराशि पर आम जनता में तीखी निंदा हो रही है। आलोचक पूछ रहे हैं कि जब रोजमर्रा की आवश्यकताओं के दाम आसमान छू रहे हों, तब राजनीतिक वर्ग इस तरह की आत्मपूर्ति कैसे उचित ठहरा सकता है?
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