महिला-बाल सुरक्षा के लिए डॉ. के.ए. पॉल ने सुझाए सात बड़े सुधार

महिला-बाल सुरक्षा के लिए डॉ. के.ए. पॉल ने सुझाए सात बड़े सुधार

आंध्र प्रदेश की छात्रा पर कथित हमले के बाद डॉ. के.ए. पॉल ने महिला और बाल सुरक्षा के लिए सात सुधार सुझाए, पुलिस जवाबदेही पर भी जोर दिया

नई दिल्ली: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर रोक लगाने के लिए ग्लोबल पीस इनिशिएटिव और प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. के.ए. पॉल ने सात प्रमुख सुधारों का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में 14 वर्षीय छात्रा पर हुए कथित हमले के बाद ये मांगें उठाईं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राप्टाडु में 21 वर्षीय हेमंत ने कथित तौर पर प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद छात्रा पर हमला किया था। डॉ. पॉल ने घटना की निंदा करते हुए पीड़िता के लिए जल्द न्याय और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

क्या हैं डॉ. पॉल के सात सुझाव?

डॉ. पॉल ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए न्याय व्यवस्था, पुलिस, परिवार और समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके सात सुझाव इस प्रकार हैं:

  1. फास्ट ट्रैक अदालतें: यौन अपराधों और बच्चों के खिलाफ अपराधों की समयबद्ध सुनवाई के लिए पर्याप्त विशेष अदालतें बनाई जाएं।
  2. पुलिस की जवाबदेही: जांच में लापरवाही या जानबूझकर देरी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
  3. समान कानून: नेताओं, मंत्रियों, उद्योगपतियों और उनके परिवारों को भी आम नागरिकों की तरह कानून का सामना करना पड़े।
  4. मीडिया और संसद की भूमिका: मीडिया स्वतंत्र रूप से गलत कामों को उजागर करे और सांसद अन्याय के मामलों को उठाएं।
  5. अभिभावकों की जिम्मेदारी: माता-पिता बच्चों की गतिविधियों और ऑनलाइन सामग्री पर ध्यान दें तथा उन्हें अनुशासन और सहमति का महत्व समझाएं।
  6. महिलाओं का सम्मान: युवाओं को महिलाओं की पसंद और फैसलों का सम्मान करना सिखाया जाए।
  7. पीड़ितों को मदद: महिला संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार समूह पीड़ितों को कानूनी और अन्य जरूरी सहायता दें।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने पर जोर

डॉ. पॉल ने सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। ये निर्देश स्वतः संज्ञान वाली रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2019 से संबंधित हैं।

इनमें विशेष अदालतों की स्थापना, हाई कोर्ट समितियों के जरिए मामलों की निगरानी और विशेष पुलिस टास्क फोर्स बनाने जैसे उपाय शामिल हैं।

अनुच्छेद 14 के तहत समान न्याय की मांग

डॉ. पॉल ने संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक स्थिति, जाति या पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी को अलग कानूनी व्यवहार नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्रियों और अन्य संबंधित संस्थाओं से महिला और बाल सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।

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