वैश्विक शांति के विषय पर अमेरिकी कंसास राज्य सीनेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय निजी नागरिक बने डॉ. के. ए. पॉल
संयुक्त राज्य अमेरिका / भारत | 19 जनवरी 2026
मानवतावादी नेता और वैश्विक शांति के पैरोकार डॉ. के. ए. पॉल ने कंसास राज्य सीनेट के सदस्यों को संबोधित करते हुए वैश्विक स्तर पर शांति, संघर्ष समाधान और जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह संबोधन इस दृष्टि से भी विशेष रहा कि किसी भारतीय निजी नागरिक द्वारा पहली बार कंसास राज्य सीनेट के सदस्यों के साथ वैश्विक महत्व के मुद्दों पर सीधा संवाद किया गया। अपने संबोधन में डॉ. पॉल ने कहा कि अमेरिका और भारत की यह साझा जिम्मेदारी बनती है कि वे दुनिया में चल रहे 58 बड़े युद्धों को रोकने की दिशा में ठोस पहल करें।
डॉ. पॉल ने अमेरिकी नेतृत्व से अपील की कि वह विश्वभर में जारी संघर्षों से निपटने के लिए कूटनीति और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दे। उन्होंने लंबे समय तक चलने वाले युद्धों से होने वाले भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान की ओर ध्यान दिलाया और भविष्य की विदेश नीति तय करते समय पूर्व सैन्य हस्तक्षेपों से सबक लेने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. पॉल का परिचय कराते हुए सीनेट के चैपलिन डॉ. सेसिल वाशिंगटन ने उनके दशकों लंबे वैश्विक मानवीय कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने शांति के उद्देश्य से विभिन्न महाद्वीपों में नेताओं और समुदायों के साथ किए गए डॉ. पॉल के प्रयासों को रेखांकित किया।
चर्चा के दौरान डॉ. पॉल ने पूर्वी यूरोप, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका सहित कई वैश्विक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में संवाद और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने तनाव कम करने और जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए प्रार्थना और सामूहिक अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया।
साथ ही, डॉ. पॉल ने दुनिया भर में अमेरिका द्वारा किए जा रहे मानवीय और परोपकारी योगदानों की सराहना की। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे संघर्ष-आधारित दृष्टिकोण के बजाय रचनात्मक वैश्विक सहभागिता के माध्यम से कमजोर और जरूरतमंद वर्गों का समर्थन जारी रखें।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. पॉल ने भारत और अमेरिका के बीच घनिष्ठ सहयोग के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उभरती भू-राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत और भरोसेमंद संबंध अत्यंत आवश्यक हैं।
इस संवाद के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों दलों के विधायकों ने शांति, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे व्यापक विषयों पर विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया।