18 सितंबर 2016 के Uri आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की 10वीं बरसी, 11 दिन बाद हुई Surgical Strikes भी बनीं अहम घटना
नई दिल्ली: 18 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले को 10 साल पूरे हो गए। 18 सितंबर 2016 की सुबह भारतीय सेना के उरी बेस पर चार आतंकवादियों ने हमला किया था। इस हमले में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक शहीद हुए और कई अन्य घायल हुए।
हमले के 11 दिन बाद, 28-29 सितंबर की रात भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार आतंकवादी लॉन्च पैड्स के खिलाफ Surgical Strikes की घोषणा की। उरी हमला और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाई भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति और सुरक्षा नीति की चर्चा में एक महत्वपूर्ण घटना बन गई।
18 सितंबर 2016 को उरी में क्या हुआ था?
18 सितंबर 2016 को सुबह करीब 5:30 बजे भारी हथियारों से लैस चार आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला क्षेत्र में स्थित उरी के भारतीय सेना बेस के प्रशासनिक परिसर पर हमला किया।
सेना के तत्कालीन आधिकारिक बयान के अनुसार, आतंकवादियों के पास AK-47 राइफल, अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर और अन्य युद्ध सामग्री थी। सेना ने चारों हमलावरों को मार गिराया। उनके पास से पाकिस्तानी निशान वाली कुछ सामग्री भी बरामद होने की बात सेना ने कही थी।
हमले के दौरान आतंकवादियों ने आग लगाने वाली गोलियों का इस्तेमाल किया, जिससे सेना के कुछ अस्थायी टेंट और शेल्टर में आग लग गई। इन आग की घटनाओं में कई जवानों की जान गई।
कैसे चला था पूरा ऑपरेशन?
हमला करीब सुबह 5:30 बजे शुरू हुआ। आतंकवादियों ने सेना के जवानों पर गोलियां चलाईं और ग्रेनेड फेंके।
सेना के अनुसार, तीन आतंकवादियों को संपर्क स्थापित होने के शुरुआती 15 मिनट के भीतर मार गिराया गया था। इसके बाद चौथे आतंकवादी को भी मार गिराया गया। पूरी मुठभेड़ करीब 8:30 बजे तक चली।
इसके बाद सेना ने पूरे सैन्य परिसर और आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। 19 सितंबर को विस्तृत तलाशी के बाद इलाके की क्लियरेंस कार्रवाई समाप्त की गई।
उरी हमले में कितने जवान शहीद हुए?
उरी हमले के तुरंत बाद सेना ने 17 जवानों के शहीद होने की जानकारी दी थी। बाद में घायलों में से कुछ जवानों की इलाज के दौरान मौत हुई और शहीदों की संख्या 19 तक पहुंची। भारत सरकार ने बाद में 19 शहीद जवानों के परिवारों के लिए मुआवजे से संबंधित जानकारी भी जारी की थी।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, शहीद जवानों में 6 बिहार और 10 डोगरा रेजिमेंट के सैनिक शामिल थे।
उरी हमले में शहीद जवानों को नमन
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक सूची में उरी हमले में शहीद जवानों के नाम शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:
- हवलदार निंब सिंह रावत
- हवलदार अशोक कुमार सिंह
- नायक सुनील कुमार विद्यार्थी
- सिपाही गणेश शंकर
- सिपाही राजेश कुमार सिंह
- सिपाही नाइमन कुजुर
- सिपाही हरेंद्र यादव
- सिपाही उइके जनराव
- सिपाही बिस्वजीत घोराई
- सिपाही गंगाधर दलई
- सिपाही राकेश सिंह
- लांस नायक राजेश कुमार यादव
- लांस नायक जी. शंकर
- सिपाही जवरा मुंडा
- सिपाही टी. एस. सोमनाथ
- हवलदार रवि पॉल
- सूबेदार करनैल सिंह
सरकारी 19 सितंबर 2016 की सूची में 17 नाम दर्ज थे; बाद में कुल शहीदों की संख्या 19 हुई। इसलिए उस समय जारी अलग-अलग सूचियों और रिपोर्टों में संख्या का अंतर दिखाई देता है।
उरी हमले के बाद क्या हुआ?
हमले के बाद LoC पर सुरक्षा बढ़ाई गई और घुसपैठ की कोशिशों पर नजर तेज की गई।
19 सितंबर को सेना ने कहा था कि वह स्थिति से निपटते हुए संयम बरत रही है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपनी पसंद के समय और स्थान पर जवाब देने की क्षमता रखती है।
इसके 11 दिन बाद भारत ने LoC के पार आतंकवादी लॉन्च पैड्स के खिलाफ Surgical Strikes की घोषणा की।
29 सितंबर 2016 की Surgical Strikes
28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना ने LoC के पार कई आतंकवादी लॉन्च पैड्स पर Surgical Strikes की।
29 सितंबर को तत्कालीन Director General of Military Operations (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने मीडिया को बताया कि सेना को ऐसे आतंकवादी समूहों के बारे में विश्वसनीय और विशिष्ट जानकारी मिली थी, जो LoC के पास लॉन्च पैड्स पर मौजूद थे और भारत में घुसपैठ कर हमले की तैयारी कर रहे थे।
भारत के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस कार्रवाई को उरी हमले के बाद की एक महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी सैन्य कार्रवाई के रूप में दर्ज किया गया है।
Surgical Strikes पर पाकिस्तान का क्या कहना था?
Surgical Strikes को लेकर भारत और पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों में अंतर रहा।
भारत ने LoC के पार आतंकवादी लॉन्च पैड्स के खिलाफ कार्रवाई की बात कही, जबकि पाकिस्तान की ओर से उस समय भारतीय दावे को स्वीकार नहीं किया गया और घटना को सीमा पार गोलीबारी के रूप में बताया गया।
इसलिए 28-29 सितंबर 2016 की कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के आधिकारिक विवरण अलग रहे।
उरी हमला क्यों बना महत्वपूर्ण मोड़?
उरी हमला केवल सैनिकों की बड़ी क्षति के कारण महत्वपूर्ण नहीं रहा, बल्कि इसके बाद भारत की घोषित सैन्य प्रतिक्रिया भी चर्चा का विषय बनी।
29 सितंबर 2016 को भारत ने LoC के पार आतंकवादी लॉन्च पैड्स के खिलाफ की गई कार्रवाई की सार्वजनिक घोषणा की। बाद के सरकारी दस्तावेजों में 2016 की Surgical Strikes को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया है।
10 साल बाद भी जवानों की याद
उरी हमले के 10 साल बाद 18 सितंबर की तारीख उन जवानों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने उस हमले में अपनी जान गंवाई।
हमले के बाद हुई सैन्य और राजनीतिक घटनाएं भारत के सुरक्षा इतिहास का हिस्सा बन गईं, लेकिन इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उन सैनिकों का स्मरण है जो अपने परिवारों के पास वापस नहीं लौट सके।
उनके नाम भारतीय सेना के इतिहास में दर्ज हैं और उनकी शहादत को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
18 सितंबर केवल भारत की सुरक्षा यात्रा की एक तारीख नहीं है। यह उन जवानों और उनके परिवारों को याद करने का दिन भी है, जिनकी जिंदगी उरी हमले के बाद हमेशा के लिए बदल गई।