ईपीएफओ पेंशनर्स ने वित्त मंत्री से की मुलाकात, ₹7,500 न्यूनतम पेंशन और डीए की मांग पर चर्चा

नई दिल्ली,

ईपीएफओ पेंशनर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और न्यूनतम पेंशन ₹7,500 प्रति माह के साथ महंगाई भत्ता (डीए) जोड़ने की अपनी लंबित मांगों पर चर्चा की। वित्त मंत्री ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईपीएस-95 नेशनल आंदोलन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने 78 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की परेशानियों को उजागर किया। ये पेंशनभोगी केंद्रीय व राज्य सरकार पीएसयू, निजी संगठनों और कारखानों से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 वर्षों से पेंशनरों ने न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने, डीए जोड़ने और पेंशनभोगियों व उनके जीवनसाथियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की मांग की है।

कमांडर राउत ने कहा, “वित्त मंत्री ने हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुना और सहानुभूतिपूर्वक विचार का भरोसा दिया। यह हमारे लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, सरकार को आगामी बजट में न्यूनतम पेंशन ₹7,500 और डीए की घोषणा करनी चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन के लिए यह आवश्यक है।”

उन्होंने ₹5,000 न्यूनतम पेंशन की मांग करने वाले कुछ श्रमिक संगठनों की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया और कहा कि ₹7,500 से कम पेंशन पर्याप्त नहीं होगी।

प्रमुख मांगें:

  1. केंद्रीय सरकार का पेंशन योगदान 1.16% से बढ़ाकर 8.33% करना।
  2. ईपीएफओ की ब्याज आय का उपयोग पेंशन बढ़ाने के लिए करना।
  3. नियोक्ता के योगदान को 8.33% से बढ़ाकर 12% करना।
  4. उच्च पेंशन के क्रियान्वयन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की विसंगतियों को सुलझाना।

सरकार से अपेक्षाएं:

2014 में घोषित ₹1,000 न्यूनतम पेंशन के बावजूद, 36.60 लाख पेंशनभोगी इससे भी कम राशि प्राप्त कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से इन खामियों को दूर करने का अनुरोध किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत, राष्ट्रीय मुख्य समन्वयक रमाकांत नारगुंड, राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. पी.एन. पाटिल और राष्ट्रीय सचिव रमेश बहुगुणा ने बैठक के सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई।

कमांडर राउत ने कहा, “वित्त मंत्री का आश्वासन सराहनीय है, लेकिन हमें ठोस कदमों की जरूरत है। देश की प्रगति में योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।”

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