नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर कार्यालय ने बुधवार को कला संकाय स्थित टैगोर ऑडिटोरियम में ‘आचारशाला’ का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘युवा, लोकतंत्र और भारत का भविष्य’ रहा, जिसमें लगभग 140 विद्यार्थियों और 20 शिक्षकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्रीय विकास, नागरिक जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में निदेशक एवं आई.एफ.एस. अधिकारी श्री नितिन प्रमोद ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रमुख प्रो. भारतेंदु पांडेय विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने की।
अपने संबोधन में श्री नितिन प्रमोद ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र प्रेस और जागरूक नागरिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य की चर्चा करते हुए सुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर बुनियादी ढांचे और नागरिक सहभागिता को देश की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।

उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं से भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक रहने तथा जीवन में दिखाई देने वाले भ्रष्टाचार के छोटे-बड़े रूपों का विरोध करने का आग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को भौगोलिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
श्री नितिन प्रमोद ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। उनके अनुसार, आज की सोच और आज किए जाने वाले कार्य ही आने वाले भारत की दिशा तय करेंगे।
विशिष्ट अतिथि प्रो. भारतेंदु पांडेय ने भारत की प्राचीन और शास्त्रीय बौद्धिक परंपराओं को आधुनिक लोकतांत्रिक नागरिकता से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को आत्म-अनुशासन और आत्म-विकास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी आवश्यक है।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय की यह आचारशाला विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र, नागरिक जिम्मेदारियों और भारत के भविष्य पर गंभीर चिंतन और संवाद का एक उपयोगी मंच साबित हुई।