क्यों कहलाता है बिहार का मुंगेर भारत की योग नगरी ? जानिए बिहार स्कूल ऑफ योग, गंगा तट, कष्टहरणी घाट, मुंगेर किला, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी जानकारी और इस ऐतिहासिक शहर की खासियत।
नई दिल्ली: बिहार का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में नालंदा, बोधगया और राजगीर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की याद आती है, लेकिन बिहार में एक और शहर है जो पूरी दुनिया में योग के लिए जाना जाता है। यह शहर मुंगेर है, जिसे अब भारत की योग नगरी के नाम से जाना जाता है।
गंगा नदी के किनारे बसा यह प्राचीन शहर अपने इतिहास के लिए बहुत प्रसिद्ध है। मुंगेर में बिहार स्कूल ऑफ योग है, जो योग शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। हर साल दुनिया भर से लोग यहां योग, ध्यान और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा सीखने आते हैं। यह शहर योग के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया है।
मुंगेर का इतिहास: हजारों वर्षों से सभ्यता और संस्कृति का केंद्र
मुंगेर भारत के सबसे पुराने नगरों में से एक माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख मुद्गगिरि (Mudgagiri) और गुप्तगढ़ (Guptagarh) नामों से मिलता है।
यह शहर समय-समय पर गुप्त साम्राज्य, पाल वंश, दिल्ली सल्तनत, मुगल शासन और ब्रिटिश शासन का महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र रहा। वर्ष 1763 में बंगाल के नवाब मीर कासिम ने अपनी राजधानी मुर्शिदाबाद से मुंगेर स्थानांतरित की थी और यहां के प्रसिद्ध मुंगेर किले को सैन्य दृष्टि से मजबूत बनाया।
आज भी मुंगेर का किला बिहार की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है।
गंगा नदी: जिसने मुंगेर को आध्यात्मिक पहचान दी
मुंगेर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है। शहर गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है, जहां नदी का बहाव अपेक्षाकृत शांत और विस्तृत दिखाई देता है।
सुबह का सूर्योदय, शाम की गंगा आरती और नदी किनारे का शांत वातावरण ध्यान एवं योग अभ्यास के लिए आदर्श माना जाता है।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक वातावरण मन को एकाग्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि गंगा के किनारे बसे मुंगेर को योग साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान माना जाता है।
कष्टहरणी घाट: आस्था और विश्वास का प्रतीक
मुंगेर का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कष्टहरणी घाट है।
‘कष्टहरणी’ का अर्थ है—वह स्थान जो कष्टों को दूर करे।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां स्नान करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं। कई लोग यह भी मानते हैं कि यहां का जल त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभदायक होता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन सदियों से चली आ रही इस आस्था के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
छठ पूजा, मकर संक्रांति और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों पर यहां लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
कैसे बना मुंगेर दुनिया का योग केंद्र?
साल 1963 में प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने मुंगेर में बिहार स्कूल ऑफ योग की स्थापना की।
उन्होंने आश्रम के लिए मुंगेर किले के भीतर गंगा किनारे स्थित शांत स्थान का चयन किया। उनका विश्वास था कि गंगा का आध्यात्मिक वातावरण साधना को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
धीरे-धीरे यह आश्रम भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में योग शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया।
आज यहां आने वाले विद्यार्थियों में डॉक्टर, वैज्ञानिक, शिक्षक, सैनिक, खिलाड़ी और विभिन्न देशों के योग प्रशिक्षक भी शामिल होते हैं।
बिहार स्कूल ऑफ योग की खास बातें
बिहार स्कूल ऑफ योग पारंपरिक भारतीय गुरुकुल प्रणाली पर आधारित शिक्षा देता है।
यहां केवल योगासन नहीं सिखाए जाते, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला पर जोर दिया जाता है।
यहां मुख्य रूप से सिखाए जाने वाले अभ्यास हैं—
- हठ योग
- राजयोग
- कर्मयोग
- ज्ञानयोग
- प्राणायाम
- योग निद्रा
- कुंडलिनी योग
- ध्यान
- मंत्र साधना
- क्रिया योग
संस्थान का उद्देश्य शरीर, मन, भावनाओं और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करना है।
गंगा दर्शन: जहां प्रकृति और योग का होता है संगम
आश्रम का मुख्य परिसर गंगा दर्शन कहलाता है।
यहां से गंगा नदी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। सुबह के समय जब साधक गंगा के सामने बैठकर ध्यान करते हैं, तो वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।
बहुत से विदेशी साधक इसे अपने जीवन का सबसे शांत और यादगार अनुभव बताते हैं।
बिहार योग भारती: योग शिक्षा का विश्वविद्यालय
बिहार स्कूल ऑफ योग के अंतर्गत बिहार योग भारती की स्थापना योग शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण के उद्देश्य से की गई।
यह संस्थान योग दर्शन, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन पर गहन अध्ययन कराता है।
यहां देश-विदेश से विद्यार्थी लंबे समय तक रहकर योग का अध्ययन करते हैं।
योग पब्लिकेशन्स ट्रस्ट: दुनिया भर में पहुंचा मुंगेर का ज्ञान
बिहार स्कूल ऑफ योग द्वारा स्थापित योग पब्लिकेशन्स ट्रस्ट ने योग पर सैकड़ों पुस्तकें प्रकाशित की हैं।
इन पुस्तकों का कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और आज दुनिया के अनेक योग संस्थानों में इन्हें प्रमाणिक संदर्भ सामग्री के रूप में पढ़ाया जाता है।
जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा—यह है योग नगरी
साल 2004 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मुंगेर पहुंचे थे।
उन्होंने बिहार स्कूल ऑफ योग के कार्यों की सराहना करते हुए मुंगेर को “योग नगरी” की पहचान दी। इसके बाद यह नाम पूरे देश और विदेश में लोकप्रिय हो गया।
- मुंगेर की अन्य प्रसिद्ध जगहें
- मुंगेर किला
- कष्टहरणी घाट
- बिहार स्कूल ऑफ योग
- गंगा दर्शन
- सीता कुंड
- चंडिका स्थान मंदिर
- पीर शाह नफ़ा दरगाह
- मुंगेर गंगा रेल-सह-सड़क पुल
- मुंगेर कैसे पहुंचें?
- रेल मार्ग
मुंगेर रेलवे स्टेशन और जमालपुर जंक्शन भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़े हुए हैं।
- सड़क मार्ग – पटना, भागलपुर, बेगूसराय, लखीसराय और अन्य शहरों से नियमित बस एवं टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।
- हवाई मार्ग – निकटतम हवाई अड्डा जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना है। इसके अलावा गया और देवघर हवाई अड्डों से भी सड़क मार्ग द्वारा मुंगेर पहुंचा जा सकता है।
क्या मुंगेर घूमने लायक है?
अगर आप इतिहास, अध्यात्म, योग, प्रकृति और गंगा घाटों को करीब से देखना चाहते हैं, तो मुंगेर आपके लिए बेहतरीन पर्यटन स्थल हो सकता है।
यहां की शांति, आध्यात्मिक माहौल और ऐतिहासिक धरोहरें इसे बिहार के सबसे खास शहरों में शामिल करती हैं।
मुंगेर केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन योग परंपरा का जीवंत केंद्र है। गंगा नदी की पवित्रता, बिहार स्कूल ऑफ योग की वैश्विक प्रतिष्ठा और सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत ने इस शहर को एक अलग पहचान दी है।
आज जब पूरी दुनिया मानसिक शांति और स्वस्थ जीवनशैली की तलाश में योग की ओर बढ़ रही है, तब मुंगेर उस ज्ञान का केंद्र बनकर खड़ा है, जहां योग केवल अभ्यास नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका माना जाता है। यही कारण है कि मुंगेर को गर्व के साथ “भारत की योग नगरी” कहा जाता है।