ITRHD का 12वां शिल्प महोत्सव संपन्न, कारीगरों की सीधी बाज़ार पहुँच से ₹50 लाख से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री

ITRHD का 12वां शिल्प महोत्सव संपन्न, कारीगरों की सीधी बाज़ार पहुँच से ₹50 लाख से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री

नई दिल्ली में आयोजित चार दिवसीय शिल्प महोत्सव ने राजस्थान और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कारीगरों को बिना बिचौलिए शहरी बाज़ार से जोड़ते हुए उल्लेखनीय व्यावसायिक और सांस्कृतिक सफलता दर्ज की।

नई दिल्ली | 10 जनवरी 2026

इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट (ITRHD) द्वारा आयोजित 12वां वार्षिक शिल्प महोत्सव शनिवार को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। चार दिनों तक चले इस आयोजन ने सीमावर्ती राजस्थान और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के कारीगरों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ते हुए अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की।

लोदी एस्टेट स्थित एलायंस फ़्रांसेज़, नई दिल्ली में आयोजित इस महोत्सव में कारीगरों को बिना किसी मध्यस्थ के अपने उत्पाद बेचने और खरीदारों से सीधा संवाद करने का अवसर मिला। आयोजकों के अनुसार, इस संस्करण में कुल बिक्री ₹50 लाख के आंकड़े को पार कर गई, जो इसे व्यावसायिक और दृश्यता—दोनों ही दृष्टियों से सबसे सफल आयोजन बनाती है।

इस महोत्सव में पश्चिमी राजस्थान के भारत–पाकिस्तान सीमा से सटे बाड़मेर ज़िले की पारंपरिक कलाओं के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ क्षेत्र की समृद्ध शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। बाड़मेर के कारीगरों ने कढ़ाई, एप्लिके वर्क, चमड़ा शिल्प, धरी बुनाई और अजरख प्रिंटिंग जैसे पारंपरिक कार्यों का प्रदर्शन किया। वहीं, आज़मगढ़ के मुबारकपुर की हथकरघा बुनाई और निज़ामाबाद की प्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

महोत्सव के अनुभव पर प्रतिक्रिया देते हुए मॉरीन लीब्ल, सह-परियोजना निदेशक एवं ट्रस्टी, आईटीआरएचडी ने कहा कि इस वर्ष मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्यक्ष बाज़ार संपर्क कारीगरों के लिए कितना प्रभावी साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ₹50 लाख से अधिक की बिक्री केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि हस्तनिर्मित उत्पादों के प्रति बढ़ते भरोसे और वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम है।

वहीं आईटीआरएचडी की प्रोजेक्ट्स डायरेक्टर मधु खत्री ने कहा कि इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि कारीगरों को अपनी बिक्री से प्राप्त पूरी आय सीधे मिली। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच न केवल आजीविका सृजन में सहायक होते हैं, बल्कि कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच दीर्घकालिक संबंध भी स्थापित करते हैं, जो शिल्प परंपराओं के संरक्षण के लिए आवश्यक हैं।

उत्तर प्रदेश की निज़ामाबाद ब्लैक पॉटरी महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। यह शिल्प पिछले कुछ वर्षों में पुनर्जीवन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। वर्ष 2022 में जर्मनी में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जापान के प्रधानमंत्री को यह कला भेंट किए जाने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। प्रदर्शनी में प्रदर्शित कई कलाकृतियाँ उसी मूल कारीगर परिवार से जुड़ी थीं, जिन्होंने इस शिल्प को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई है।

इसके अलावा, आज़मगढ़ के हरिहरपुर गाँव की सांस्कृतिक पहचान—जो बनारस घराने की शास्त्रीय संगीत परंपरा से जुड़ी है—को भी महोत्सव में स्थान मिला। एक विशेष शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति ने शिल्प प्रदर्शनी को सांस्कृतिक गहराई प्रदान की।

ITRHD का 12वां शिल्प महोत्सव संपन्न, कारीगरों की सीधी बाज़ार पहुँच से ₹50 लाख से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री

आईटीआरएचडी पिछले छह से सात वर्षों से बाड़मेर के कारीगरों के साथ लगातार कार्य कर रहा है और हर वर्ष नए प्रतिभागियों को जोड़कर अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। ट्रस्ट न केवल प्रदर्शनियों का आयोजन करता है, बल्कि डिज़ाइन सहयोग, उत्पाद नवाचार और बाज़ार तक पहुँच सुनिश्चित करने के साथ-साथ कारीगरों की भागीदारी से जुड़े खर्च भी स्वयं वहन करता है, ताकि उन्हें बिक्री का पूरा लाभ मिल सके।

अपने 12वें संस्करण के साथ यह शिल्प महोत्सव अब नई दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण और नियमित आयोजन बन चुका है। इसके अतिरिक्त, आईटीआरएचडी जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में भी इसी तरह का वार्षिक शिल्प आयोजन करता है, जिससे राजस्थान के कारीगरों के साथ निरंतर जुड़ाव बना रहे।

इस वर्ष की रिकॉर्ड बिक्री, मज़बूत सहभागिता और बढ़ती जन-रुचि यह दर्शाती है कि ऐसे संवेदनशील और बाज़ार-उन्मुख मंच भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ कारीगरों को सम्मानजनक और टिकाऊ आजीविका प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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