29 साल पहले आज ही के दिन...रतीय क्रिकेट की तस्वीर

29 साल पहले आज ही के दिन लॉर्ड्स में गूंजा था ‘दादा’ का बल्ला, डेब्यू सेंचुरी ने बदल दी थी भारतीय क्रिकेट की तस्वीर

22 जून 1996 को सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स में अपने टेस्ट डेब्यू पर 131 रन बनाकर इतिहास रच दिया। जानिए कैसे भारतीय क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत हुई

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ तारीखें सिर्फ़ रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत के तौर पर याद की जाती हैं। 22 जून, 1996 ऐसी ही एक तारीख है। इसी दिन, इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर, सौरव गांगुली ने अपने पहले टेस्ट मैच में 131 रनों की शानदार पारी खेलकर दुनिया को बता दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया स्टार मिल गया है।

दिलचस्प बात यह है कि गांगुली को इस मैच में खेलने का मौका बिल्कुल अचानक मिला था। फिर भी, उन्होंने न सिर्फ़ इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाया, बल्कि इसे एक ऐतिहासिक पल में बदल दिया। उनके साथ राहुल द्रविड़ ने भी 95 रनों की बेहतरीन पारी खेली और भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक मज़बूत नींव रखी।

क्या हुआ था उस दिन ?

लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा टेस्ट मैच चल रहा था। मैच के तीसरे दिन—22 जून, 1996 को—सौरव गांगुली ने अपनी पहली टेस्ट पारी में शतक लगाया। वे 301 गेंदों पर 131 रन बनाकर आउट हुए; उनकी इस पारी में 20 चौके शामिल थे।

वे लॉर्ड्स में अपने टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक बन गए। आंकड़ों के हिसाब से, गांगुली टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाने वाले 10वें भारतीय खिलाड़ी और लॉर्ड्स में यह कारनामा करने वाले तीसरे बल्लेबाज थे। उस मैच में भारत ने पहली पारी में 429 रन बनाए थे।

कब और किन हालात में खेली गई थी यह पारी ?

यह मैच 20 से 24 जून, 1996 के बीच खेला गया था। तीसरे दिन भारतीय टीम मुश्किल में थी; एक समय 202 रन पर पांचवां विकेट गिर गया था। ऐसे नाजुक मोड़ पर, दो नए खिलाड़ी—गांगुली और राहुल द्रविड़—क्रीज़ पर साथ आए।

इस जोड़ी ने छठे विकेट के लिए 94 रन जोड़े और टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। द्रविड़ अपने पहले शतक से बस पांच रन दूर रह गए और 95 रन पर आउट हो गए—यह अपने आप में एक अनोखी बात थी कि डेब्यू मैच में दो नए खिलाड़ी शतक बनाने के इतने करीब पहुंच गए थे।

कहाँ हुआ यह सब ?

यह मैच लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में खेला गया, जिसे क्रिकेट की दुनिया में “होम ऑफ़ क्रिकेट” (क्रिकेट का घर) कहा जाता है। हर क्रिकेटर का सपना होता है कि उसका नाम इस मैदान के ‘ऑनर्स बोर्ड’ पर लिखा जाए। गांगुली ने अपने पहले ही मैच में यह उपलब्धि हासिल की और उनका नाम आज भी वहाँ सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है।

कौन थे इस कहानी में मुख्य खिलाड़ी ?

सौरव गांगुली — उन्होंने 131 रन बनाकर मैच में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी का स्थान हासिल किया। खास बात यह है कि यह पूरे मैच का सबसे बड़ा स्कोर था, न कि सिर्फ़ भारतीय पारी का।
राहुल द्रविड़ — वे 95 रन बनाकर शतक से चूक गए, लेकिन अपनी बेहतरीन तकनीक से सबका दिल जीत लिया।
वेंकटेश प्रसाद — उन्होंने पाँच विकेट लेकर इंग्लिश टीम की पारी को रोकने में अहम भूमिका निभाई।
टीम में सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अज़हरुद्दीन (कप्तान) और अनिल कुंबले जैसे सीनियर खिलाड़ी भी शामिल थे।

क्यों माना जाता है इस पारी को इतना खास ?

उस दौर में, भारतीय बल्लेबाजी मुख्य रूप से सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद अजहरुद्दीन पर निर्भर थी। गांगुली और द्रविड़ के आने से टीम को दो नए और भरोसेमंद बल्लेबाज मिले, जो आगे चलकर एक दशक से भी ज़्यादा समय तक भारतीय क्रिकेट की रीढ़ बने।

बाद में, सौरव गांगुली भारतीय टीम के कप्तान बने और उन्होंने टीम में एक नई, आक्रामक सोच पैदा की। उनकी कप्तानी में, भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक ऐतिहासिक सीरीज़ जीती और 2003 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई।

कैसे मिला गांगुली को यह मौका ?

गांगुली का इंटरनेशनल करियर असल में 1991 में ही शुरू हो गया था, लेकिन शुरुआती नाकामियों के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक कड़ी मेहनत करने के बाद, उन्हें 1996 के इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में जगह मिली।

उन्हें पहले टेस्ट में खेलने का मौका नहीं मिला। हालांकि, तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ अनबन के कारण नवजोत सिंह सिद्धू ने दौरा बीच में ही छोड़ दिया, जिससे टीम में एक जगह खाली हो गई। इस मौके का फ़ायदा उठाते हुए, टीम मैनेजमेंट ने दूसरे टेस्ट में गांगुली और द्रविड़ दोनों को मैदान पर उतारा—और बाकी तो इतिहास है।

लॉर्ड्स में मुश्किल स्विंग बॉलिंग का सामना करते हुए, गांगुली ने ज़रा भी जल्दबाज़ी नहीं दिखाई। बहुत सब्र के साथ बैटिंग करते हुए, उन्होंने शानदार कवर ड्राइव और ऑफ़-साइड पर ज़बरदस्त शॉट खेले और लगभग सात घंटे तक क्रीज़ पर डटे रहे।

खास बात यह है कि गांगुली ने ट्रेंट ब्रिज में हुए अगले ही टेस्ट में एक और सेंचुरी लगाई—यानी उन्होंने अपने पहले दो टेस्ट मैचों में लगातार दो सेंचुरी बनाईं, जो एक दुर्लभ उपलब्धि है।

गांगुली ने अपने टेस्ट करियर में कुल 7,212 रन बनाए—जिसमें 16 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं—और उन्हें भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में गिना जाता है।

आज भी, जब क्रिकेट के शौकीन लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर ‘S.C. Ganguly – 131’ लिखा हुआ देखते हैं, तो यह सिर्फ़ एक आँकड़ा नहीं लगता; बल्कि, यह उस कहानी की याद दिलाता है जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा हमेशा के लिए बदल दी।

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