‘‘जब भाजपा में ही जाना था तो इतना ड्रामा क्यों किया”: राज्यसभा विवाद पर नवनीत चतुर्वेदी का पलटवार

“अगर भाजपा में ही जाना था तो इतना ड्रामा क्यों किया”: राज्यसभा मुद्दे पर नवनीत चतुर्वेदी का जवाब

चंडीगढ़ | 27 अप्रैल 2026

पंजाब की राजनीति में जारी हलचल के बीच नवनीत चतुर्वेदी ने सोमवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर अक्टूबर 2025 के राज्यसभा चुनाव विवाद, हालिया घटनाक्रम और अपने खिलाफ लगे आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए नवनीत चतुर्वेदी ने कहा कि उनका नाम और चेहरा पंजाब के लिए गुमनाम नहीं है। अक्टूबर 2025 में हुए पंजाब राज्यसभा चुनाव के दौरान उन पर नामांकन में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। पर्चे दर्ज कराए गए कि उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर किए। उस समय उन्हें “ऑपरेशन लोटस” का मास्टरमाइंड बताया गया, किसी ने उन्हें भाजपा का एजेंट कहा, तो किसी ने “फ्रॉड 420” तक घोषित कर दिया।

उन्होंने कहा कि सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों ने ये आरोप लगाए, वे आज खुद भाजपा में शामिल हो चुके हैं और अब दावा कर रहे हैं कि उनके साथ पंजाब के 63 आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि जिन्होंने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं या बयान दिए, वे भी आगे चलकर भाजपा में शामिल हो जाएं।

चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि जब भाजपा में ही शामिल होना था, तो अक्टूबर में इतना “ड्रामा” करने की क्या जरूरत थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजिंदर गुप्ता के लिए उन पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए, फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए और उन्हें जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति “नेचुरल जस्टिस” का उदाहरण है, क्योंकि जिनके लिए यह सब किया गया, वही राजिंदर गुप्ता अब पार्टी बदल चुके हैं।

उन्होंने बताया कि उन्होंने राजिंदर गुप्ता के चुनाव को निरस्त करने की मांग करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटिशन (EP-2/2025) दाखिल की है। इस मामले में गुप्ता को नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन वे पिछली दो तारीखों से किसी न किसी बहाने से जवाब देने से बच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में शामिल होकर गुप्ता यह संदेश देना चाहते हैं कि अब कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

चतुर्वेदी ने यह भी दावा किया कि गुप्ता की ओर से उनके पास प्रस्ताव भेजा गया कि वे अपनी पिटिशन वापस ले लें। बदले में उनके खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने और उन्हें उचित मुआवजा देने की बात कही गई, जिसे उन्होंने साफ तौर पर ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा कि आज हालात अपने आप यह साबित कर रहे हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत थे। 63 विधायकों के समर्थन के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है और अपनी गिनती पूरी करने के लिए भी चतुर्वेदी की मदद मांगी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से राघव चड्ढा के करीबी लोगों ने उनसे संपर्क कर 63 विधायक “तोड़ने” में सहयोग मांगा, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “जब मैं यह खुद करने जा रहा था अक्टूबर में, तब मुझे रोका गया और साजिशन विफल किया गया, और आज मुझसे ही मदद मांगी जा रही है।”

चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि अब उनकी किसी भी प्रकार की जोड़-तोड़ या जुगाड़ वाली राजनीति में कोई रुचि नहीं है और वे केवल अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजिंदर गुप्ता भले ही भाजपा में शामिल हो गए हों, लेकिन वे अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे।

उन्होंने दावा किया कि उनके पास एक ऐसे विधायक का समर्थन है, जिनके हस्ताक्षर 13 अक्टूबर को दाखिल नामांकन में शामिल थे। वह विधायक इस पूरे मामले से आहत हैं और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट में गवाही देने को तैयार हैं कि उनके हस्ताक्षर वास्तविक थे। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय गुप्ता ने स्वयं अनुरोध किया था कि विधायक चतुर्वेदी का समर्थन न करें, लेकिन आज वही व्यक्ति पार्टी बदल चुका है।

उन्होंने कहा कि गुप्ता का चुनाव हाईकोर्ट द्वारा रद्द होना तय है, हालांकि अदालत का फैसला आने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि वे अपनी कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रखेंगे।

चतुर्वेदी ने कहा कि अब उनका ध्यान केवल जमीनी राजनीति पर है। उन्होंने बताया कि वे आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वे पंजाब के मूल निवासी नहीं हैं और न ही पंजाबी भाषा में दक्ष हैं, लेकिन उन्होंने राज्य के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। उनका उद्देश्य राज्यसभा चुनाव के दौरान यह सुनिश्चित करना था कि विधायकों को स्वतंत्र रूप से वोट देने का अधिकार मिले और उन पर कोई उम्मीदवार थोपा न जाए।

उन्होंने आम आदमी पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विधायकों को अपनी मर्जी से राज्यसभा सांसद चुनने दिया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
अंत में, उन्होंने कहा कि दो-तिहाई बहुमत का दावा सही नहीं है। उनके अनुसार, संबंधित राज्यसभा सीट न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और यदि एक विधायक का हलफनामा भी उनके पक्ष में आता है, तो यह साबित करने के लिए पर्याप्त होगा कि उनका नामांकन अवैध तरीके से रद्द किया गया था, जिससे चुनाव निरस्त हो सकता है और दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि राजिंदर गुप्ता की छवि अब तक साफ रही है और उन पर किसी एजेंसी की कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उनके अनुसार भाजपा में शामिल होना उनकी राज्यसभा सीट बचाने की कोशिश है।

चतुर्वेदी ने यह भी उल्लेख किया कि जब वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यपाल जैन हाईकोर्ट में गुप्ता की ओर से पेश हुए थे, तभी उन्हें संकेत मिल गया था कि गुप्ता भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का असर गुप्ता के व्यावसायिक हितों, विशेषकर ट्राइडेंट ग्रुप, पर भी पड़ सकता है।

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