पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को गुरु काशी यूनिवर्सिटी का सहारा, अनाथ बच्चों को देगी नि:शुल्क शिक्षा

पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को गुरु काशी यूनिवर्सिटी का सहारा, अनाथ बच्चों को देगी नि:शुल्क शिक्षा

हमले में अपने पिता को खो चुके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी यूनिवर्सिटी, कुलाधिपति ने कहा – ‘सेवा और शिक्षा हमारी प्राथमिकता’

कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई, जिसने पूरे देश को गमगीन कर दिया है। इस अमानवीय घटना की कठोर निंदा करते हुए गुरु काशी यूनिवर्सिटी (GKU) ने एक मानवीय और संवेदनशील कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ने घोषणा की है कि इस हमले में जिन बच्चों ने अपने पिता को खोया है, उन्हें GKU में पूरी तरह नि:शुल्क शिक्षा दी जाएगी।

इस फैसले की जानकारी यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री एस. गुरलाभ सिंह सिद्धू ने प्रेस के माध्यम से दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पीड़ित परिवारों को दीर्घकालिक सहायता देने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

कुलाधिपति सिद्धू का भावुक संदेश:
“पहलगाम की घटना से पूरा देश दुखी है। गुरु काशी यूनिवर्सिटी एक सेवा-आधारित संस्था है और ऐसे समय में हम इन बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। यह हमारा कर्तव्य है कि इन बच्चों को हम उनका खोया आत्मबल लौटाएं।”

सिद्धू ने आतंकवाद के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के सख्त रुख का समर्थन भी किया। उन्होंने इस हमले को कायरतापूर्ण बताते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाली ताकतें कभी हमारे समाज को तोड़ नहीं सकतीं।

एकता, संवेदना और शिक्षा ही हमारा उत्तर:
कुलाधिपति ने स्पष्ट कहा कि गुरु काशी यूनिवर्सिटी देश के साथ खड़ी है और आतंकवाद के खिलाफ चल रही सरकारी मुहिम का समर्थन करती है। “हम एक नागरिक और शिक्षक होने के नाते जवाब देंगे – एकता से, संवेदना से और शिक्षा के जरिए,” उन्होंने जोड़ा।

संवेदना और सहयोग का संदेश:
GKU ने हमले में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना जताई और कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। यूनिवर्सिटी ने कश्मीरी समाज की सहनशक्ति और शांतिप्रिय भावना की सराहना करते हुए कहा कि हिंसा फैलाने वाली ताकतों की मंशा को सफल नहीं होने देंगे।

शिक्षा को बनाया बदलाव का माध्यम:
गुरु काशी यूनिवर्सिटी का मानना है कि शिक्षा, समाज में सकारात्मक बदलाव और सशक्तिकरण का सबसे मजबूत जरिया है। यूनिवर्सिटी ने अन्य शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज से भी अपील की कि वे इस मानवीय पहल में भाग लें और एकजुट होकर आतंकवाद तथा नफरत फैलाने वाली ताकतों का मुकाबला करें।

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